लखनऊ, 8 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के काबिल बनाने के लिए अप्रेंटिसशिप योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस योजना के जरिए 2025-26 में अब तक 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में काम सीखने का मौका मिला है। यहां युवाओं को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि असली काम का तजुर्बा भी मिल रहा है।
सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, असली तजुर्बा
राज्य के कौशल विकास मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि अप्रेंटिसशिप के जरिए युवाओं को मैदान में उतरकर काम सीखने का मौका दिया जा रहा है। इससे उनकी काबिलियत बढ़ रही है और नौकरी मिलने की राह आसान हो रही है। नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इससे उद्योगों की दिलचस्पी बढ़ी है और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग का मौका मिल रहा है।
युवाओं और उद्योग दोनों को फायदा
अप्रेंटिसशिप के दौरान युवाओं को आर्थिक सहारा मिलता है और उद्योगों को प्रशिक्षु रखने पर प्रोत्साहन राशि मिलती है। इससे दोनों पक्षों को फायदा हो रहा है। सरकार का मानना है कि यह तरीका रोजगार और कौशल विकास दोनों के लिए कारगर है।
चार साल में 795 नए उद्योग जुड़े
पिछले चार वर्षों में 795 नए उद्योगों और संस्थानों ने अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। इससे अलग-अलग जिलों में ट्रेनिंग के मौके बढ़े हैं और युवाओं को अपने ही इलाके में काम सीखने का अवसर मिल रहा है। सीएमएपीएस योजना के तहत 6,164 नए युवाओं को भी प्रशिक्षण का लाभ मिला है। इन योजनाओं से युवाओं को नौकरी लायक हुनर मिल रहा है, जिससे उनकी नियुक्ति की संभावना बढ़ रही है।
नौ साल में 4 लाख से ज्यादा युवाओं को मौका
बीते करीब नौ वर्षों में 4 लाख से ज्यादा युवाओं को औद्योगिक संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है। यह उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार ने प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, ऑनलाइन पोर्टल मजबूत किया है और उद्योगों से तालमेल बढ़ाया है। मकसद यही है कि युवा हुनरमंद बनें, रोजगार पाएं और प्रदेश की तरक्की में अपना हिस्सा निभाएं।






