लखनऊ, 7 फरवरी 2026:
यूपी ने बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं, सुरक्षित क्षेत्रों और लाभान्वित जनसंख्या में लगातार और उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार की योजनाबद्ध और जनकेंद्रित कार्यप्रणाली के चलते यूपी आज देश में बाढ़ प्रबंधन का मॉडल स्टेट बनकर उभरा है।
प्रदेश के आठ प्रमुख रिवर बेसिन गंगा, यमुना, गण्डक, सरयू, रामगंगा, राप्ती-रोहिन, सोन और गोमती के डूब क्षेत्रों में वर्ष 2017 से अब तक कुल 1,950 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से न सिर्फ बाढ़ से सुरक्षा मिली है बल्कि सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्राप्त हुआ है। इसी अवधि में 3,869 किलोमीटर लंबाई के 523 तटबंधों का निर्माण किया गया। इससे लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में जहां 74 परियोजनाएं संचालित की गई थीं वहीं 2018-19 में यह संख्या बढ़कर 111 हो गई। इसके परिणामस्वरूप बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र 0.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.88 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। वर्ष 2019-20 और 2020-21 में 151 और 196 परियोजनाओं के जरिए क्रमशः 2.88 और 5.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की गई।
वर्ष 2021-22 में 167 परियोजनाओं से बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र दोगुना होकर 10.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जिससे 46.26 लाख लोगों को राहत मिली। इसके बाद 2022-23 में 283 परियोजनाओं से 3.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सुरक्षित हुआ। वर्ष 2023-24 बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से अब तक का सर्वश्रेष्ठ वर्ष रहा, जब 362 परियोजनाओं के माध्यम से 10.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और 68.97 लाख लोग सुरक्षित किए गए।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 285 परियोजनाओं के जरिए 4.33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। साथ ही प्रदेश में 10,727 ड्रेनेज परियोजनाओं के विस्तार के लिए नए ड्रेजिंग कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। निरंतर प्रयासों और ठोस योजनाओं के दम पर उत्तर प्रदेश आज बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में देश का मार्गदर्शक राज्य बन चुका है।





