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वाहन स्क्रैपिंग में UP बना देश का सिरमौर, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को नई रफ्तार

सर्वाधिक 94,094 वाहनों की स्क्रैपिंग, देश में सबसे ज्यादा 45 आरवीएसएफ केंद्र यूपी में, इसके बाद हरियाणा और राजस्थान, पुराने, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले और असुरक्षित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है नीति

लखनऊ, 14 जनवरी 2026:

यूपी ने प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के डैशबोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार गत दिसंबर माह तक यूपी में कुल 94,094 वाहनों की स्क्रैपिंग की जा चुकी है। यह संख्या देश में अब तक स्क्रैप किए गए कुल वाहनों का लगभग 42 प्रतिशत है। ये राज्य की सक्रियता और प्रभावी नीति को दर्शाती है।

वाहन स्क्रैपिंग के मामले में यूपी के बाद हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का स्थान आता है। पुराने, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले और असुरक्षित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की यह नीति वायु प्रदूषण कम करने में सहायक सिद्ध होने के साथ आधुनिक, सुरक्षित और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा भी दे रही है।

डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 तक पूरे देश में लगभग 3.94 लाख वाहनों की स्क्रैपिंग की गई है। इनमें करीब 1.65 लाख सरकारी वाहन और 2.29 लाख निजी व व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि वाहन स्क्रैपिंग नीति देशभर में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रभावी उपकरण बनकर उभरी है।

रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) केंद्रों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत प्रदेश में अब तक 84 आरवीएसएफ केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 45 केंद्रों का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इन केंद्रों में वाहनों को वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट किया जाता है, जिससे प्रदूषण के स्तर में कमी आई है और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

आरवीएसएफ केंद्रों की संख्या में हरियाणा दूसरे स्थान पर है, जबकि राजस्थान और गुजरात इसके बाद आते हैं। केंद्र सरकार की यह नीति फिलहाल देश के 21 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, लेकिन उत्तर प्रदेश इस दिशा में सबसे अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। यहां परिवहन विभाग स्वयं स्क्रैपिंग प्रक्रिया के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी निभा रहा है, जिससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो रही है। वाहन स्क्रैपिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।

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