लखनऊ, 27 नवंबर 2025 :
उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ हवा में घुलते ज़हर ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े शहरों की हवा इतनी खराब हो गई है कि लोगों के लिए बाहर निकलना तक चुनौती बन गया है। तापमान गिर रहा है और एयर क्वालिटी भी लगातार नीचे जा रही है।
खराब स्थिति में है लखनऊ का AQI
यूपी की राजधानी लखनऊ में 27 नवंबर की सुबह धुंध से भरी और बेहद ठंडी रही। लेकिन मौसम से ज्यादा डराने वाली बात यह है कि यहाँ की हवा अब ”poor” कैटेगरी में पहुंच चुकी है। सुबह का AQI 200 से 300 के बीच झूलता रहा, जो ऑरेंज जोन में आता है और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला स्तर माना जाता है। लालबाग में हाल सबसे खराब रहा, जहाँ सुबह 7 बजे AQI 281 दर्ज हुआ यानी रेड ज़ोन के बिलकुल करीब। तालकटोरा इंडस्ट्रियल सेंटर का AQI 249 रहा, जबकि केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र में यह 213 तक पहुंच गया। राजधानी की हवा हर घंटे और जहरीली होती दिखाई दे रही है।

वाराणसी-प्रयागराज की हवा भी खराब
वाराणसी और प्रयागराज पिछले कई दिनों से खराब हवा की गिरफ्त में हैं। नवंबर शुरू होते ही इन शहरों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता चला गया। यहाँ AQI 150 से 250 के बीच बना हुआ है, जो moderate से poor श्रेणी में आता है। प्रयागराज के झूंसी इलाके में आज AQI 165 दर्ज हुआ, जबकि वाराणसी लगभग 150 के स्तर पर रहा। खासकर शहरी भागों में लोग सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सुबह-शाम धुंध की मोटी परत महसूस कर रहे हैं।
क्या है दिल्ली से सटे जिलों का हाल?
दिल्ली-NCR के करीब बसे यूपी के जिले तो स्थिति और भी ज्यादा खराब झेल रहे हैं। गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और हापुड़ में हवा “very poor” से सीधे “severe” कैटेगरी में पहुंच चुकी है। नोएडा के सेक्टर-125 में आज सुबह AQI 366 दर्ज हुआ, जबकि सेक्टर-116 में यह 406 तक पहुंच गया, जो सीधे गंभीर श्रेणी में आता है। गाजियाबाद के लोनी में AQI 434, इंदिरापुरम में 389 और ग्रेटर नोएडा में 388 रहा। हापुड़ और मेरठ जैसे शहर भी 300+ एयर क्वालिटी के साथ खराब हवा की मार झेल रहे हैं। मुजफ्फरनगर में AQI 357 दर्ज हुआ, जिससे साफ है कि पूरा NCR बेल्ट जहरीली हवा से घिरा हुआ है।
क्या आगे और बढ़ेंगी मुश्किलें?
मौसम विभाग के अनुसार हाल फिलहाल हालात सुधरने के आसार नहीं हैं। उल्टा कोहरा और ठंड और बढ़ने वाले हैं, जिससे प्रदूषण ज़मीन पर ही अटक जाएगा और हवा की क्वालिटी और खराब हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और अस्थमा मरीजों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।






