लखनऊ, 15 फरवरी 2026:
यूपी में चुनावी गर्मी से पहले समाजवादी पार्टी (एसपी) के पीडीए अभियान को बड़ा राजनीतिक बल मिला है। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने रविवार को सपा की सदस्यता ग्रहण की। यूपी की राजधानी लखनऊ में हुए इस कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया और स्मृति-चिह्न के साथ अहिल्याबाई की तस्वीर भेंट की। इस अवसर पर नसीमुद्दीन की पत्नी और बेटे सहित कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी सपा में शामिल हुए।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री नेता अनीस अहमद ‘फूल बाबू’, प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार, देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा और पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से जुड़े रहे दानिश खान के आने से मंच पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ को व्यापक बनाने का राजनीतिक संदेश साफ दिखा। महिला नेताओं में रचना पाल, हुसना सिद्दीकी, पूनम पाल और अल्का सहित कई कार्यकर्ताओं ने भी सदस्यता ली।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी विचारधारा की तारीफ करते हुए कहा कि समाजवाद और सपा का रिश्ता आत्मीय है। उन्होंने सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे हमेशा ‘नेताजी’ से प्रभावित रहे हैं। शेरो-शायरी के अंदाज में उन्होंने मंच को जोश से भर दिया और दावा किया कि बेरोजगारी भत्ता और छात्रों को लैपटॉप जैसी योजनाओं से युवाओं को दिशा देने का काम सपा सरकारों ने किया। बीएसपी से आए नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने वरिष्ठता का सम्मान करने की बात कही और संगठन के भीतर सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया।

अखिलेश यादव ने भी सियासी तंज कसते हुए कहा कि आज हमारे पास फूल आ गए हैं, तो किसी का फूल मुरझाता जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक तरीकों पर सवाल उठाते हुए प्रमाणपत्रों की राजनीति पर कटाक्ष किया और कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सामाजिक संतुलन और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस मौके पर नसीमुद्दीन की पत्नी हुसना सिद्दीकी, बेटे अफजल सिद्दकी, बस्ती के पूर्व विधायक राधेलाल, मौलाना जगीर, विनोद (बामसेफ प्रदेश अध्यक्ष), यूसुफ खां (पूर्व में बहुजन समाज पार्टी से जुड़े), ख्वाजादीन, शंभू प्रजापति समेत बड़ी संख्या में नेता व कार्यकर्ता सपा में शामिल हुए। सपा का संदेश पीडीए के जरिए 2027 की राह मजबूत करना और संगठनात्मक विस्तार को तेज करना है।






