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डिस्टिलरी हब बनने की तैयारी में यूपी, इस नई आबकारी नीति से खुलेगा निवेश का दरवाजा

नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत प्रदेश सरकार डिस्टिलरी उद्योग और निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी में है, जिससे निवेश, रोजगार, राजस्व वृद्धि के साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधा लाभ मिलेगा

लखनऊ, 15 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश को गति देने और राजस्व संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में आबकारी विभाग नई आबकारी नीति 2026-27 को लेकर गहन मंथन कर रहा है। प्रस्तावित नीति के तहत प्रदेश में डिस्टिलरी प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राजस्व वृद्धि और निवेश आकर्षित करना जरूरी है। इसी सोच के साथ डिस्टिलरी उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया है। नई नीति में डिस्टिलरी इकाइयों की स्थापना को सरल बनाया जाएगा, जिससे न केवल सरकारी राजस्व बढेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

आबकारी विभाग लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर विचार कर रहा है। शुल्क ढांचे को व्यावहारिक बनाने और जरूरी अनुमतियों में सहूलियत देने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और प्रदेश डिस्टिलरी उद्योग के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। निवेश मित्र और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहलों के बाद यह नीति उसी दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।

नई आबकारी नीति में निर्यात को भी खास प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में उत्पादित स्पिरिट और अल्कोहल से जुड़े उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए नियमों में ढील, बेहतर लॉजिस्टिक्स और अतिरिक्त प्रोत्साहन पर विचार किया जा रहा है। इससे प्रदेश के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और विदेशी मुद्रा आय में भी बढोतरी होगी।

डिस्टिलरी उद्योग के विस्तार से कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढेगी। गन्ना, अनाज और अन्य फसलों की खपत बढने से किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही इस सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है।

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