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UP में ‘पानी’ की पोल खुली! 522 प्लांटों पर छापेमारी, 140 बंद मिले, 164 के लाइसेंस सस्पेंड

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की बड़ी और सख्त कार्रवाई, 382 इकाइयां से पानी के 387 नमूने जांच के लिए भेजे गए लैब, रिपोर्ट आने के बाद होगा एक्शन

लखनऊ, 17 जनवरी 2026:

यूपी में पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर और मिनरल वाटर की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। आम उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशभर में एक साथ सघन जांच अभियान चलाया गया। इसमें लखनऊ समेत विभिन्न जिलों में संचालित 522 पैक्ड पानी बनाने वाले प्लांटों पर छापेमारी की गई।

इस व्यापक अभियान के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। निरीक्षण में कुल 522 पैकेज्ड वाटर प्रसंस्करण इकाइयों की जांच की गई। इनमें से 140 इकाइयां मौके पर ही बंद पाई गईं। इससे यह साफ हो गया कि बड़ी संख्या में प्लांट या तो अवैध रूप से संचालित हो रहे थे या लंबे समय से बिना किसी निगरानी के बंद पड़े थे। जो 382 इकाइयां निरीक्षण के समय संचालित पाई गईं उनमें से पानी के 387 नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए।

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इन सभी नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां पानी की गुणवत्ता, स्वच्छता और मानकों के अनुरूपता की गहन जांच की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान 104 प्रसंस्करण इकाइयों में विभिन्न प्रकार की कमियां पाई गईं। वहां स्वच्छता की कमी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और मानक प्रक्रियाओं का पालन न करना मिला।

इन इकाइयों को सुधार नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है जिससे वे तय समय में खामियों को दूर कर सकें। वहीं, 164 इकाइयों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद एफएसडीए ने उनके खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और व्यवसाय बंद कराने का फैसला लिया है। विभाग ने साफ किया है कि नियमों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

एफएसडीए अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में जिन पैकेज्ड वाटर इकाइयों के नमूने जांच में असुरक्षित पाए गए थे, उनके खाद्य लाइसेंस भी निलंबित किए जाएंगे। विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे सघन अभियान जारी रहेंगे।

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