लखनऊ, 19 जनवरी 2026:
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा मंचों में शुमार ‘साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026’ में इस बार भारत और खासतौर पर उत्तर प्रदेश की साइबर क्षमता वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने जा रही है। 26 से 28 जनवरी 2026 तक इजराइल के तेल अवीव में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी के साइबर विशेषज्ञ भारत की तकनीकी ताकत, अनुभव और इनोवेटिव मॉडल को दुनिया के सामने रखेंगे।
इस वैश्विक सम्मेलन में भारत से दो दिग्गजों को चीफ मेंटर के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक माधवन उन्नीकृष्णन नायर और उत्तर प्रदेश से ‘एशिया के साइबर कॉप’ के रूप में पहचान बना चुके प्रो. त्रिवेणी सिंह शामिल हैं। दोनों विशेषज्ञ दुनिया भर के शीर्ष साइबर वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और टेक्नोलॉजी लीडर्स के सामने भारत के साइबर सुरक्षा मॉडल, नीति ढांचे और व्यवहारिक अनुभव साझा करेंगे।
सम्मेलन में अमेरिका, जापान, इंग्लैंड, जर्मनी, स्पेन, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, संयुक्त अरब अमीरात, फिलीपींस, रोमानिया, हंगरी, अल्बानिया, उरुग्वे सहित 20 से अधिक देशों के साइबर दिग्गज शामिल होंगे। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के तौर पर शिरकत करेंगे, जिससे आयोजन की वैश्विक अहमियत और बढ़ जाती है।
उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर सुरक्षा को प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे का अहम हिस्सा बनाया गया है। एआई, साइबर सिक्योरिटी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्क वेब, साइबर अपराध और आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस रणनीति पर काम हो रहा है। इसी क्रम में प्रो. त्रिवेणी सिंह द्वारा चलाया जा रहा ‘साइबर सेफ उत्तर प्रदेश’ अभियान देशभर में चर्चा का विषय बना है।
तेल अवीव में प्रो. त्रिवेणी सिंह अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर बताएंगे कि किस तरह उत्तर प्रदेश ने साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराधों से निपटने के लिए एक मजबूत और प्रभावी सिस्टम खड़ा किया है। वहीं माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत के राष्ट्रीय साइबर फ्रेमवर्क और नीति अनुभव को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे।
यह सम्मेलन भारत की साइबर शक्ति को वैश्विक पहचान देने के साथ देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम भी साबित होगा। साथ ही साइबर टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों के द्वार भी खुलेंगे।






