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दिल्ली दरबार में यूपी का भविष्य! योगी-मोदी की मुलाकात, मंत्रिमंडल विस्तार की ये है हलचल

राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को यूपी मंत्रिमंडल विस्तार के साथ संगठनात्मक फेरबदल और मिशन 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा, मंत्रिमंडल विस्तार में नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने की हो सकती है कोशिश

लखनऊ/नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026:

यूपी की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर करीब 45 मिनट तक मुलाकात की। इस मुलाकात को औपचारिक ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया जा रहा है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे यूपी मंत्रिमंडल विस्तार, संगठनात्मक फेरबदल और मिशन 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच प्रदेश की विकास योजनाओं, केंद्र-राज्य समन्वय और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर बदलाव की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। यूपी कैबिनेट में कई मंत्री पद फिलहाल खाली हैं, जिन्हें भरने की कवायद तेज हो गई है।

योगी आदित्यनाथ का यह दिल्ली दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उसी समय यूपी के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी देश की राजधानी में मौजूद हैं। ब्रजेश पाठक ने सोमवार सुबह भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी ने अटकलों को और हवा दे दी है। माना जा रहा है कि दिल्ली में हाईकमान के साथ इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम रूपरेखा पर सहमति बन सकती है।

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मुख्यमंत्री योगी का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। खास तौर पर नितिन नबीन के साथ होने वाली बैठक को यूपी भाजपा संगठन में संभावित बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दे रहा है। thehohalla news 

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक और जातिगत समीकरणों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। हाल ही में पंकज चौधरी को ओबीसी समाज से प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को इसी रणनीति की शुरुआत माना जा रहा है। अब मंत्रिमंडल विस्तार में भी नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।

चर्चा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं जबकि कुछ नए चेहरों की एंट्री भी संभव है। गौरतलब है कि यूपी मंत्रिमंडल में रिक्त पदों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में यह विस्तार भाजपा के लिए संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारी को धार देने का अहम कदम माना जा रहा है। योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा यूपी की राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है जिसकी तस्वीर आने वाले दिनों में और साफ हो सकती है।

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