नई दिल्ली, 4 दिसंबर 2025 :
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज भारत आ रहे हैं, और उनके साथ आएगा दुनिया का सबसे रहस्यमय सुरक्षा कवच। एक ऐसा सुरक्षा सिस्टम, जो हर पल सक्रिय रहता है। इस दौरे में पीएम नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच अहम बातचीत होगी, वहीं पुतिन की सुरक्षा टीमें जमीन से लेकर आसमान और साइबर स्पेस तक हर खतरे पर नजर रखने के लिए हर घड़ी तैयार रहेंगी।
दुनिया का सबसे अभेद्य सुरक्षा कवच
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दुनिया के सबसे सुरक्षित नेताओं में गिना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके चारों ओर सिर्फ बॉडीगार्ड्स नहीं, बल्कि एक हाइपर एडवांस्ड सुरक्षा व्यवस्था होती है, जो टेक्नोलॉजी, कमांडो यूनिट और साइबर शील्ड का एक जबरदस्त मिश्रण है। जब पुतिन किसी देश में कदम रखते हैं, तो उनका हर सेकेंड, हर कदम और हर इशारा कई लेयर की सुरक्षा के अंदर होता है। पुतिन की निजी सुरक्षा का सबसे बड़ा स्तंभ है Russian Federal Protective Service (FSO)। FSO में कर्मियों का चयन इतना कठिन होता है कि दुनिया की किसी भी एजेंसी से मुकाबला कर सकता है। इन सभी की कई बार जांच होती है। ट्रेनिंग इतनी कठिन होती है कि एक-एक गार्ड सालों बाद ड्यूटी के लायक बनता है।
रूस की सबसे गुप्त एलीट कमांडो यूनिट
पुतिन की सुरक्षा का दूसरा स्तंभ है रूस की सबसे गुप्त एलीट कमांडो यूनिट Zaslon। यह टीम FSB के तहत काम करती है और इसकी जानकारी दुनिया को तब ही मिलती है जब वे किसी बड़े मिशन में दिख जाएं। यही कमांडो पुतिन की विदेश यात्राओं में अदृश्य सुरक्षा घेरा बनाते हैं। एयरपोर्ट, होटल, गलियारे, इमारतें सब उनकी नज़रों के हिसाब से सुरक्षित किए जाते हैं। इनके पास आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और काउंटर-असॉल्ट का विशेष प्रशिक्षण होता है, और ये किसी भी हमले पर पल भर में जवाब देने में सक्षम हैं।
पुतिन के सबसे नजदीक रहने वाली टीम
Presidential Security Service पुतिन की प्रोटेक्शन का तीसरा और सबसे समीपस्थ हिस्सा है। यह 8-12 एजेंटों की वह टीम है जो हर सेकंड पुतिन के 5-7 मीटर के दायरे में रहती है। इन एजेंटों के पास बुलेटप्रूफ ब्रीफकेस, कस्टम-डिजाइन जैकेट, हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन डिवाइस और एक मोबाइल कमांड रूम तक की सुविधा रहती है। ये एजेंट हर स्थिति में पुतिन को ढाल बनकर कवर देने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
6 किलो TNT झेलने वाली पुतिन की कार
पुतिन की कार Aurus Senat दुनिया की सबसे सुरक्षित गाड़ियों में गिनी जाती है। देखने में चाहे यह एक लग्ज़री लिमोज़ीन लगे, लेकिन वास्तव में यह एक आर्मर्ड किला है। यह 6 किलो TNT के धमाके को झेल सकती है और इसमें एंटी-मिसाइल डिफेंस, आग-रोधी शील्ड, रन-फ्लैट टायर, एन्क्रिप्टेड नेटवर्क और एंटी-ड्रोन डोम जैसी तकनीकें मौजूद हैं। कार का सुरक्षा सिस्टम किसी भी खतरे को पुतिन से कई मीटर दूर ही रोक देता है।
कैसे होता है पुतिन के बॉडीगार्ड्स का चयन?
पुतिन की सुरक्षा में शामिल बॉडीगार्ड्स के चयन की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है। इन्हें सिर्फ हथियारों और फिटनेस के आधार पर नहीं, बल्कि ऑपरेशनल साइकोलॉजी, कठोर परिस्थितियों में निर्णय क्षमता, मानसिक संतुलन, और यहां तक कि मौसम सहनशीलता तक पर परखा जाता है। इन एजेंटों के पास हमेशा 9mm SR-1 Vektor पिस्तौल रहती है, जो कवच-भेदी गोलियों के लिए मशहूर है।
पुतिन की यात्रा से पहले की जाती है खास तैयारी
पुतिन की किसी भी विदेश यात्रा से पहले उनकी सुरक्षा टीम गुप्त रूप से उस देश में पहुंचती है। वे एयरपोर्ट, होटल, रूट मैप, मीटिंग स्थल-हर चीज़ का कई बार निरीक्षण करती है। बम-डिटेक्शन डिवाइसेज़, जैमर, साइबर शील्ड और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण पहले से लगा दिए जाते हैं। पुतिन के ठहरने वाली जगह को मल्टी-लेयर सुरक्षा से घेर दिया जाता है।
35 साल की उम्र के बाद खत्म हो जाती है बॉडीगार्ड की नौकरी
एक दिलचस्प तथ्य यह है कि पुतिन के बॉडीगार्ड्स को 35 वर्ष की उम्र पूरी होने पर हटा दिया जाता है। लेकिन यह हटाना एक बड़े पुरस्कार की शुरुआत होता है। सेवा मुक्त होने के बाद इन्हें अक्सर क्षेत्रीय गवर्नर, संघीय मंत्री, विशेष कमांडर या राष्ट्रपति प्रशासन जैसे बेहद शक्तिशाली पदों पर नियुक्त किया जाता है।






