लखनऊ, 4 जनवरी 2026:
तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और डिजिटल ठगी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। यूपी पुलिस में अब साइबर कमांडो नामक एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इसे देश के शीर्ष तकनीकी और सुरक्षा संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। इन साइबर कमांडो को एसपीजी और एनएसजी कमांडोज की तर्ज पर तैयार किया गया है जिससे वे डिजिटल दुनिया में अपराधियों से उसी सख्ती और कुशलता से निपट सकें।
साइबर एवं सीआईडी के डीजी बिनोद कुमार सिंह के मुताबिक सीएम योगी ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। इस पर विशेष टीम का गठन किया गया है। पहले चरण में 15 पुलिसकर्मियों को चयनित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन अधिकारियों का चयन उनकी तकनीकी दक्षता, विश्लेषणात्मक क्षमता और फील्ड अनुभव के आधार पर किया गया।

डीजी ने बताया कि इन साइबर कमांडो को आईआईटी कानपुर, नयारायपुर, मद्रास और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गुजरात द्वारा साइबर फॉरेंसिक्स, डिजिटल ट्रेसिंग और ऑनलाइन अपराधों की जांच से संबंधित विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण के बाद साइबर कमांडो को पुलिस जोनल स्तर और मुख्यालय में तैनात कर दिया गया है जिससे किसी भी साइबर अपराध की सूचना मिलते ही त्वरित और तकनीकी रूप से सटीक कार्रवाई की जा सके।
इन साइबर कमांडो की भूमिका केवल साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं होगी। वे साइबर अटैक, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध, डेटा चोरी, फिशिंग, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में भी अहम भूमिका निभाएंगे। साथ ही ये कमांडो जिला और थाना स्तर के पुलिसकर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर साइबर अपराधों की पहचान और जांच की क्षमता मजबूत हो सके। thehohalla news
योगी सरकार ने इन साइबर कमांडो को अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस किया है। इनमें एडवांस्ड सॉफ्टवेयर, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डेटा एनालिटिक्स सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इनकी मदद से साइबर अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करना, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करना और पूरे अपराध नेटवर्क तक पहुंचना आसान होगा।
सरकार का मानना है कि अब कानून-व्यवस्था केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अपराधियों का नया हथियार बन चुके हैं। ऐसे में पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है। साइबर कमांडो की तैनाती इसी दिशा में एक मजबूत कदम है जो प्रदेश में नागरिकों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।






