Lucknow City

प्लॉट-फ्लैट के नाम पर 600 करोड़ की ठगी… लखनऊ में रोहतास ग्रुप पर ED का बड़ा एक्शन

लखनऊ जोनल कार्यालय ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत की 77 चल-अचल संपत्तियों को किया जब्त, कंपनी ने निवेशकों से मिली रकम दूसरी जमीन खरीदने में खपाई, निवेश के बदले फ्लैट का दिया था प्रलोभन, न लौटाई रकम और न मिला मकान

लखनऊ, 24 जनवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट के नाम पर निवेशकों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सख्त कार्रवाई की है। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत की 77 चल-अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। ये संपत्तियां मूल रूप से करीब 158.85 करोड़ रुपये में खरीदी गई थीं लेकिन वर्तमान बाजार मूल्य कई गुना बढ़ चुका है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि रोहतास ग्रुप ने निवेशकों से लगभग 600 करोड़ रुपये हड़प लिए हैं। जब्त की गई संपत्तियों में से 141.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां रोहतास ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, उसकी सहयोगी कंपनी वर्धन टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी और कुछ बेनामीदारों के नाम पर पंजीकृत हैं। इसके अलावा 17.64 करोड़ रुपये की संपत्तियां हाईनेस इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज पाई गई हैं। सभी अचल संपत्तियां लखनऊ के विभिन्न इलाकों में स्थित हैं।

ईडी ने यह कार्रवाई निवेशकों की ओर से दर्ज कराई गईं 83 एफआईआर के आधार पर की है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर रोहतास ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने सुल्तानपुर रोड, रायबरेली रोड और रोहतास प्लमेरिया जैसी टाउनशिप योजनाओं के नाम पर ग्राहकों से प्लॉट और फ्लैट बुकिंग के लिए भारी रकम वसूली थी।

कंपनी ने निवेशकों को यह लालच दिया था कि बुकिंग की तारीख से 30 महीने के भीतर या तो उन्हें संपत्ति पर कब्जा दे दिया जाएगा या फिर बुकिंग राशि का 150 प्रतिशत एकमुश्त वापस किया जाएगा लेकिन तय समय सीमा बीतने के बावजूद न तो किसी परियोजना का विकास हुआ और न ही निवेशकों की जमा पूंजी लौटाई गई।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि खरीदारों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल प्रमोटरों ने अपनी सहयोगी कंपनियों और बेनामीदारों के नाम पर जमीन खरीदने में किया। इन संपत्तियों को छिपाने के लिए पहले वर्धन टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड और बाद में अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी को ट्रांसफर कर दिया गया।

इतना ही नहीं दीपक रस्तोगी ने कुछ बेनामी भूखंडों को बैंकों के पास गिरवी रखकर साफ-सुथरे बैंकिंग फंड भी हासिल किए। फिलहाल ईडी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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