Lucknow City

19वीं रमजान पर लखनऊ में अकीदत का सैलाब : हजरत अली की याद में निकला जुलूस

कूफा मस्जिद से इमामबाड़ा तकी जैदी तक काले कपड़ों में पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग गमगीन माहौल में मातम करते नजर आए, जुलूस के दौरान ताबूत को देखने, छूने और चूमने के लिए अकीदतमंदों में रही होड़

लखनऊ, 9 मार्च 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार को अकीदत और नम आंखों से 19वीं रमजान पर जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में शिया समुदाय के हजारों लोग शामिल हुए। जुलूस के साथ काले कपड़ों में पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग गमगीन माहौल में मातम करते नजर आए।

जुलूस से पहले सआदतगंज स्थित कूफा मस्जिद में मजलिस आयोजित की गई जहां नमाज अदा करने के बाद हजरत अली की शहादत को याद करते हुए दुआ मांगी गई। इसके बाद यहीं से जुलूस रवाना हुआ। यह जुलूस टूरियागंज, सरकटा नाला और बिल्लौचपुरा होते हुए चौक स्थित पाटा नाला के पास इमामबाड़ा तकी जैदी तक पहुंचा।

जुलूस के दौरान ताबूत को देखने, छूने और चूमने के लिए अकीदतमंदों में होड़ दिखाई दी। लोग मातमी नौहे पढ़ते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरे रास्ते माहौल गमगीन लेकिन श्रद्धा से भरा रहा। दरअसल, इस दिन को इस्लामी इतिहास में बेहद अहम माना जाता है। बताया जाता है कि 19वीं रमजान को जब हजरत अली नमाज अदा करने के लिए कूफा ( इराक) की मस्जिद पहुंचे थे तभी उन पर तलवार से हमला किया गया था। इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद 21वीं रमजान को उनकी शहादत हो गई थी। इसी घटना की याद में हर साल शिया समुदाय की ओर से यह जुलूस निकाला जाता है।

19th Ramzan in Lucknow Thousands Join Procession (1)

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि करीब 1400 वर्ष पहले आज ही के दिन हजरत अली पर हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठानी है तो सबसे पहले उस हमले का विरोध होना चाहिए जिसमें हजरत अली शहीद हुए थे।

चार से पांच किलोमीटर लंबे इस जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग पर पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहे। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की गई जबकि कई इमारतों की छतों पर भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार इस जुलूस में हजारों लोग शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।

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