National

29 पुराने कानून हुए खत्म…अब सिर्फ ये 4 नियम तय करेंगे देश के हर मजदूर की किस्मत!

सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी, सभी मजदूरों के लिए मिनिमम वेज और गिग वर्कर्स को पहली बार कानूनी पहचान… नए लेबर कोड से कामकाज की दुनिया में क्या बदल जाएगा?

लखनऊ, 22 नवंबर 2025 :

भारत सरकार ने देश के करोड़ों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है। शुक्रवार से पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह 4 नए लेबर कोड लागू हो गए हैं। इन नए नियमों का मकसद हर कामगार को समय पर सैलरी, ओवरटाइम का सही पैसा, सुरक्षित कामकाज का माहौल और सोशल सिक्योरिटी देना है। अब सिर्फ 1 साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी। फ्री हेल्थ चेकअप और महिलाओं को बराबर मौके जैसी कई गारंटियां इसमें शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि पुराने कानून 1930 से 1950 के बीच बने थे और आज की जरूरतों पर खरे नहीं उतर रहे थे। इसलिए इन्हें सरल बनाकर 4 साफ और आधुनिक लेबर कोड में बदला गया है।

ये हैं 4 नए लेबर कोड-

1-वेतन पर कोड, 2019 (Code on Wages, 2019)

2-सोशल सिक्योरिटी पर कोड, 2020 (Industrial Relations Code, 2020)

3-सोशल सिक्योरिटी पर कोड, 2020 (Code on Social Security, 2020)

4-ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ और वर्किंग कंडीशंस (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020)

PM मोदी ने कहा बदलाव से मजबूत होंगे मजदूरों के अधिकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा कि नए लेबर कोड से लोगों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। महिलाओं और युवाओं को ज्यादा अवसर मिलेंगे। समय पर सैलरी, सुरक्षित वर्कप्लेस और सोशल सिक्योरिटी की गारंटी मिलेगी। पीएम के अनुसार यह कदम भारत की आर्थिक ग्रोथ को और तेज करेगा और रोजगार बढ़ाने में मदद करेगा।

ट्रेड यूनियनों की क्या है आपत्ति?

10 ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त फोरम ने इन लेबर कोड्स का विरोध किया है। उनका कहना है कि नए नियम मजदूरों से ज्यादा मालिकों के हित में हैं। वहीं भारतीय मजदूर संघ ने इन बदलावों का स्वागत करते हुए इन्हें लंबे समय से जरूरी बताया।

नए लेबर कोड से क्या होंगे फायदे?

फिक्स्ड टर्म कर्मचारी को परमानेंट जैसा फायदा

अब फिक्स्ड टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लोगों को भी परमानेंट कर्मचारियों जैसे लाभ मिलेंगे। सोशल सिक्योरिटी, मेडिकल कवर और पेड लीव सब मिलेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ग्रेच्युटी पाने के लिए पहले 5 साल जरूरी थे लेकिन अब सिर्फ 1 साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी।

सभी मजदूरों के लिए एक जैसी न्यूनतम मजदूरी

देश भर के सभी सेक्टर्स में मजदूरों को नेशनल फ्लोर रेट से जुड़ी न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। समय पर पेमेंट जरूरी होगा और बिना वजह की कटौती नहीं हो पाएगी।

महिलाएं अब सभी शिफ्ट में काम कर सकेंगी

महिलाओं को नाइट शिफ्ट और खतरनाक जगहों जैसे माइनिंग या मशीनरी वाले एरिया में भी काम करने की अनुमति मिलेगी। लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी। बराबर वेतन जरूरी रहेगा।

काम के घंटे और ओवरटाइम पर साफ नियम

काम के घंटे 8 से 12 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे हफ्ते के तय किए गए हैं। ओवरटाइम का भुगतान दोगुना मिलेगा। कुछ सेक्टर्स में 180 दिन काम करने के बाद छुट्टियां जोड़नी शुरू होंगी।

हर मजदूर को मिलेगा अपॉइंटमेंट लेटर

अब हर एम्प्लॉयर को अपने कर्मचारी को अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा। इससे नौकरी का रिकॉर्ड साफ रहेगा और बेनिफिट पाने में आसानी होगी। इससे IT, टेक्सटाइल, डॉक और कई सेक्टर्स में रोजगार और ज्यादा फॉर्मल होंगे।

गिग वर्कर्स को पहली बार पहचान

ऑनलाइन वर्कर, जैसे कैब ड्राइवर, फूड डिलीवरी और ऐप आधारित मजदूरों को पहली बार कानून में पहचान मिली है। कंपनियों को उनकी कमाई का एक हिस्सा वेलफेयर फंड में देना होगा। आधार से जुड़े फायदे देशभर में पोर्टेबल होंगे।

जोखिम भरे कामों में फ्री हेल्थ चेकअप जरूरी

खतरनाक फैक्ट्रियों, खदानों या बड़ी यूनिट्स में काम करने वाले मजदूरों का हर साल फ्री हेल्थ चेकअप कराना अनिवार्य होगा। इन इंडस्ट्रीज में सेफ्टी कमेटी बनाना भी जरूरी है।

सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ा

MSME कर्मचारी, खतरनाक जगह पर अकेले काम करने वाले मजदूर और वो सेक्टर जो पहले ESI के दायरे से बाहर थे, अब सोशल सिक्योरिटी के अंदर आएंगे।

दायरे में आए मीडिया और डिजिटल वर्कर्स

अब पत्रकार, फ्रीलांसर, डबिंग आर्टिस्ट और मीडिया वर्कर्स को भी लेबर प्रोटेक्शन मिलेगा। उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर, तय समय पर सैलरी और नियमबद्ध वर्किंग आवर्स मिलेंगे।

कॉन्ट्रैक्ट और माइग्रेंट मजदूरों की सुरक्षा मजबूत

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स और दूसरे राज्यों से आए मजदूरों को अब स्थायी कर्मचारियों जितना वेतन, वेलफेयर स्कीम और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। कंपनियों को पीने का पानी, साफ-सफाई और आराम की जगह उपलब्ध करानी होगी।

मजदूरों को सुरक्षित माहौल और रोजगार बढ़ाने की बड़ी पहल

नए लेबर कोड का मकसद देश के हर मजदूर और कर्मचारी को सुरक्षित, सम्मानजनक और नियमबद्ध कामकाज का माहौल देना है। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार बढ़ेगा और उद्योगों में पारदर्शिता आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button