लखनऊ, 29 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा किए गए व्यापक सुधार अब केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर साफ तौर पर जमीन पर दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के साथ सरकारी कामकाज की शैली भी बदली है। जहां पहले फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं, अब समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। नियामक सुधारों के जरिए वर्षों पुरानी जटिल प्रक्रियाओं को खत्म किया गया है, जिससे शासन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया है।
पुराने कानून खत्म, कारोबार को मिली राहत
योगी सरकार ने 577 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया है और बड़ी संख्या में अनुपालनों को समाप्त किया है। इसके साथ ही 948 पुराने कानूनों को खत्म कर दिया गया है। ट्रेड लाइसेंस जैसी अनिवार्य बाध्यताओं को हटाने से उद्योग और व्यापार को बड़ी राहत मिली है। इन फैसलों के बाद उत्तर प्रदेश उद्योग और निवेश के लिए एक पसंदीदा राज्य बनकर उभरा है।

निवेश और रोजगार को मिली रफ्तार
नियामक सुधारों के बाद निवेश प्रस्तावों में तेज वृद्धि देखने को मिली है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय और निर्णयों की समयसीमा तय होने से अनिश्चितता कम हुई है। पहले जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में सालों लग जाते थे, वे अब तय समय में पूरी हो रही हैं। इससे पूंजी निवेश बढ़ा है और रोजगार सृजन को भी गति मिली है। उद्यमी एसके आहूजा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को जिस तरह जमीन पर लागू किया गया है, वह अन्य राज्यों के लिए मिसाल है। देश और विदेश के निवेशक अब उत्तर प्रदेश की ओर देख रहे हैं और प्रदेश तेजी से ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
एमएसएमई सेक्टर को मिली मजबूती
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इन सुधारों का सबसे बड़ा लाभ एमएसएमई सेक्टर को मिला है। प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जो जल्द ही एक करोड के आंकड़े को पार कर जाएंगी। नियमों की सरलता ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है। पंजीकरण प्रक्रिया आसान होने और दंडात्मक प्रावधान कम होने से कारोबारी अब बिना डर अपने व्यवसाय का विस्तार कर पा रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों मजबूत हुई हैं।
श्रम कानूनों में सुधार से बेहतर माहौल
श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से औद्योगिक माहौल में शांति देखने को मिल रही है। कारावास जैसे कठोर प्रावधान हटने से नियोक्ता और श्रमिकों के बीच संवाद बेहतर हुआ है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी के अनुसार अन्य राज्यों के उद्योग संगठन भी अपनी सरकारों से उत्तर प्रदेश जैसे सुधार लागू करने की मांग कर रहे हैं। विवाद समाधान के लिए सुधारात्मक और मध्यस्थता आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने से उद्योगों में कामकाज का वातावरण बेहतर हुआ है।
डिजिटल गवर्नेंस से बढ़ी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार से निगरानी व्यवस्था मजबूत हुई है। विभिन्न पोर्टल और डैशबोर्ड के जरिए परियोजनाओं की प्रगति पर सीधी नजर रखी जा रही है। वरिष्ठ स्तर पर नियमित समीक्षा से विभागों की जवाबदेही तय हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक सरलीकरण, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अपराधमुक्त प्रावधानों का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक है। इसी कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ी है।






