लखनऊ, 6 मार्च 2026:
यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने आरोप लगाया कि सीएम योगी का ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ का दावा हकीकत से कोसों दूर है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वंशराज ने अपने बयान में कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 8,689 पद खाली पड़े हैं। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार डॉक्टरों की अनुपस्थिति में बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने का दावा करती है लेकिन राजधानी लखनऊ से लेकर दूरदराज के गांवों तक सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। इससे गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां उनसे मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं।
आप प्रवक्ता ने स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लेवल-2 के 7,240 पदों में से 5,497 पद खाली हैं। लेवल-3 के 5,199 पदों में केवल 2,007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इसके अलावा संयुक्त निदेशक के 2,555 पदों में से 1,330, एडिशनल डायरेक्टर के 70 में से 58 और डिप्टी डायरेक्टर (सर्जन) के 970 में से 157 पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर मैनपावर संकट को दर्शाते हैं।
उन्होंने ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 2,391 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी जिसमें 601 विशेषज्ञ और 1,790 एमबीबीएस डॉक्टरों के पद शामिल थे लेकिन इंटरव्यू होने के महीनों बाद भी परिणाम घोषित नहीं किया गया। इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता और मेरिट के विवाद में फंस गई है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जुमलेबाजी से बीमारियां ठीक नहीं होतीं। अगर सरकार की प्राथमिकता जनता के स्वास्थ्य पर होती तो आज अस्पतालों में दवाओं की कमी, एक्सरे फिल्म तक का अभाव और खराब पड़ी मशीनों जैसी समस्याएं नहीं होतीं। आप ने मांग की है कि प्रदेश के सभी खाली पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाए, सरकारी अस्पतालों में दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू की जाए।






