
लखनऊ, 30 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद फायर सेफ्टी को लेकर प्रशासन की सख्ती तेज हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और अन्य विभागों द्वारा शहरभर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई को लेकर लखनऊ व्यापार मंडल खुलकर सामने आ गया है। संगठन के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र व अन्य पदाधिकारियों ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापारियों को बलि का बकरा बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
अमरनाथ मिश्र ने कहा कि अलीगंज अग्निकांड किसी एक व्यक्ति या विभाग की नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थित शहरी व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और सामूहिक गैरजिम्मेदारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि केवल नोटिस चस्पा कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इससे व्यापारियों में भय और भ्रम का माहौल पैदा हो रहा है। प्रशासन और समाज के बीच विश्वास भी कमजोर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि लखनऊ के कई बाजार करीब 200 वर्ष पुराने हैं। इंदिरानगर, गोमतीनगर, राजाजीपुरम और कानपुर रोड जैसी कॉलोनियों का विकास अलग-अलग समय में हुआ। आबादी के अनुपात में एलडीए और आवास विकास परिषद ने पर्याप्त व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित नहीं किए। इसके कारण लोगों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार छोटे-छोटे प्रतिष्ठान स्थापित कर लिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारी एजेंसियों द्वारा निर्मित व्यावसायिक भवन भी फायर सेफ्टी मानकों पर खरे नहीं उतरते तो केवल व्यापारियों को दोषी ठहराना कितना उचित है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी भवन में गंभीर खामियां थीं तो संबंधित विभागों ने वर्षों तक उसकी रजिस्ट्री, व्यवसायिक बिजली कनेक्शन, जल कनेक्शन, जीएसटी पंजीकरण और अन्य लाइसेंस कैसे जारी किए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही केवल व्यापारियों की नहीं बल्कि योजना बनाने और निगरानी करने वाले विभागों की भी तय होनी चाहिए।

अमरनाथ मिश्र ने पुराने लखनऊ में अंग्रेजों के समय लगाए गए फायर हाइड्रेंट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान अधिकांश हाइड्रेंट जमीन के नीचे दब गए। पिछले दस वर्षों से उनके नक्शे उपलब्ध कराने की मांग के बावजूद संबंधित विभागों ने कोई पहल नहीं की। उनका कहना था कि यदि इन हाइड्रेंटों को दोबारा चालू कर दिया जाए तो संकरी गलियों में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन वाहनों को तत्काल पानी मिल सकेगा और नुकसान कम होगा।
व्यापार मंडल ने सुझाव दिया कि व्यापारियों और संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर चरणबद्ध तरीके से व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। जहां संभव हो वहां अग्निशमन उपकरण और हाइड्रेंट लगाए जाएं तथा पुराने भवनों में उपलब्ध विकल्पों के अनुसार सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। श्री मिश्र ने कहा कि व्यापारी सुरक्षा के लिए आर्थिक सहयोग देने को भी तैयार हैं लेकिन एकतरफा कार्रवाई स्वीकार नहीं करेंगे।
व्यापारियों ने पुलिस और अग्निशमन विभाग की तैयारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस को रास्ता खाली कराना चाहिए ताकि फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच सके। साथ ही आधुनिक फायर उपकरण, फायर सूट और प्रशिक्षित संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन केवल व्यापारियों पर कार्रवाई करता रहा और विभागों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो अवैध वसूली बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में व्यापारी आंदोलन करेंगे और प्रतीकात्मक रूप से अपनी दुकानों की चाबियां प्रशासन को सौंपने पर भी विचार करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी पवन मनोचा, जितेंद्र सिंह चौहान, देवेंद्र गुप्ता, अनुराग मिश्रा, उमेश शर्मा, नीरज जौहर, सुहैल हैदर अल्वी, सोमेश मिश्रा, मनीष गुप्ता सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।






