
लखनऊ, 3 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित अवैध बहुमंजिला इमारत में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि इतनी गंभीर लापरवाही आखिर कैसे हुई। कोर्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पीड़ितों को मुआवजा देने के अलग-अलग पैमानों पर भी आपत्ति जताते हुए एक समान नीति बनाने पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सवाल किया कि आवासीय भवन में व्यावसायिक बिजली कनेक्शन किस आधार पर स्वीकृत किया गया और अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
इस बीच अग्निकांड की जांच कर रही दो सदस्यीय एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में उन विभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल हैं जिनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। रिपोर्ट जल्द मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। इसके बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई होने की संभावना है।
एसआईटी ने घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और विभिन्न विभागों से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आग लगने के कारणों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने वाले एलडीए के वर्तमान और कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों की कार्यशैली की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ दंड की संस्तुति की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस इमारत में आग लगी उसका स्वीकृत विद्युत भार 20 किलोवाट था जबकि वास्तविक खपत 35 किलोवाट से अधिक थी। इसके बावजूद बिजली विभाग ने भवन स्वामी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
उधर, एलडीए की विहित प्राधिकारी कोर्ट में इस अवैध भवन के मामले की पहली सुनवाई 7 जुलाई को होगी। उसी दिन यह तय होने की संभावना है कि इमारत पर बुलडोजर कब चलेगा। एलडीए ने 23 जून को भवन स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। फिलहाल भवन स्वामी को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।






