
देहरादून, 6 जुलाई 2026:
श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का दौरा कर राज्य की आधुनिक Disaster Management System का करीब से अध्ययन किया। नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत पहुंचे अधिकारियों ने पूर्व चेतावनी प्रणाली, भूस्खलन जोखिम कम करने के उपाय, मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था, आपदा के दौरान समन्वय तंत्र और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे कई पहलुओं की जानकारी ली।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं है। जोखिम कम करने, पहले से तैयारी, अलग-अलग विभागों के बेहतर तालमेल, क्षमता निर्माण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर लगातार काम किया जा रहा है ताकि व्यवस्था ज्यादा असरदार बन सके।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) और डीआईजी राजकुमार नेगी ने अधिकारियों को बताया कि राज्य में आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। उन्होंने State Emergency Operation Center, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, Incident Response System, Multi Source Early Warning System, अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया और सूचना तकनीक आधारित निर्णय प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग उपग्रह आधारित निगरानी, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी यंत्र और अन्य आधुनिक तकनीकों से लगातार मौसम संबंधी आंकड़े जुटाता है। इन आंकड़ों के रियल टाइम विश्लेषण के बाद अल्पकालिक, मध्यम अवधि और प्रभाव आधारित मौसम पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं।
उत्तराखंड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को Landslide Management के लिए अपनाई जा रही वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संवेदनशील ढलानों की भू-वैज्ञानिक जांच, Remote Sensing, GIS Mapping, ड्रोन सर्वे, लगातार निगरानी, वर्षा आधारित विश्लेषण और जोखिम आकलन के जरिए खतरे वाले इलाकों की पहचान की जाती है। इसके बाद ढलानों को स्थिर करने, जल निकासी सुधारने और जरूरी इंजीनियरिंग कार्य कराए जाते हैं। श्रीलंका में भी भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाएं अधिक होने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यवस्थाओं में खास दिलचस्पी दिखाई।

कार्यक्रम में एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एपी सिंह, डॉ. एमके भंडारी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डॉ. पीडी माथुर समेत श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हेवाजुलिगे मधुपानी अप्सरा चित्रानाली पियासेना, बामुनु अरच्चिगे चमरा प्रेमनाथ बामुनु अरच्ची और एडम लेब्बे मोहम्मद अजमी भी मौजूद रहे।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव से मजबूत होगी आपदा प्रबंधन व्यवस्था
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि ऐसे अध्ययन कार्यक्रम अलग-अलग देशों के बीच अनुभव साझा करने का बेहतर जरिया हैं। इससे संस्थागत क्षमता बढ़ती है और आपदा जोखिम कम करने के लिए ज्यादा प्रभावी रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का अनुभव दूसरे देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, वहीं वैश्विक अनुभवों से राज्य भी नई सीख हासिल कर सकता है।
52 देशों के अधिकारियों को दे चुका है प्रशिक्षण
एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एपी सिंह ने बताया कि संस्थान अब तक 52 देशों के सिविल सेवा अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला चुका है। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के सहयोग कार्यक्रम के तहत आयोजित यह अध्ययन दौरा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव साझा करने की दिशा में अहम पहल है।






