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Startups की होगी बल्ले-बल्ले! योगी सरकार की नई नीति से फंडिंग, सब्सिडी और निवेश का बड़ा पैकेज

यूपी स्टार्टअप नीति-2026 और स्टार्टअप मिशन को योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी, एआई-रोबोटिक्स समेत डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन, 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ, 7 जुलाई 2026:

यूपी को देश का सबसे बड़ा स्टार्टअप और नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दी है। नई नीति का लक्ष्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को नई गति देना, युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना और वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के अभियान को मजबूती देना है।

स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से स्केल-अप तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर स्केल-अप तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता दी जाएगी। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह दो वर्ष के लिए कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये, जबकि सीड फंडिंग 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।

पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन पर 2 करोड़ तक की प्रतिपूर्ति

नई नीति में स्टार्टअप्स को वित्तीय मजबूती देने के लिए कई आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन पर 2 करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति, 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी तथा ईपीएफ और ईएसआई की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे स्टार्टअप्स की शुरुआती आर्थिक चुनौतियां कम होंगी और उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष पैकेज तैयार

सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किया है। ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल सहायता और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता मिलेगी।

इन्क्यूबेटर्स को भी पहले से अधिक मिलेगी सहायता

इन्क्यूबेटर्स को भी पहले से अधिक सहायता देने का फैसला किया गया है। इनके लिए पूंजीगत अनुदान 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये किया गया है, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स को 1.50 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा। परिचालन व्यय अनुदान भी बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

हाईटेक रिसर्च व इनोवेशन के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

प्रदेश में अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिनका फोकस एआई, मशीन लर्निंग, हेल्थटेक, एग्रीटेक, स्पेस टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। इनके लिए वित्तीय सहायता भी बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही राज्य स्तर पर डीप-टेक यू-हब स्थापित होगा, जहां स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेंटरशिप और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी।

गांवों व छोटे शहरों के युवाओं तक स्टार्टअप संस्कृति पहुंचाने की कोशिश

नई नीति के तहत बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, स्टार्टअप वीक, ग्रैंड चैलेंज, नवाचार संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि गांवों और छोटे शहरों के युवाओं तक भी स्टार्टअप संस्कृति पहुंच सके। मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। इनके बेहतर समन्वय और प्रभावी संचालन के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना की जाएगी।

कैबिनेट से मंजूर यह मिशन आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्टार्टअप, नवाचार, इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप और निवेश गतिविधियों की नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा। इससे प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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