
लखनऊ, 8 जुलाई 2026:
यूपी में कृषि उत्पादों के परिवहन पर अचानक लागू की गई जियो टैगिंग व्यवस्था के खिलाफ व्यापारियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र के नेतृत्व में व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंडी निदेशक को ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित अथवा निरस्त करने की मांग की। व्यापारियों ने इसे व्यावहारिक कठिनाइयों को बढ़ाने वाला और अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बताया।
व्यापार मंडल का कहना है कि प्रदेश के बाहर से आने वाले कृषि उत्पादों के लिए पहले से ही प्री-अराइवल स्लिप की अनिवार्य व्यवस्था लागू है। इसके तहत व्यापारी स्वयं कर देयता स्वीकार करता और माल का पूरा विवरण विभाग के पास उपलब्ध रहता है। ऐसे में उसी माल पर जियो टैगिंग लागू करना केवल प्रक्रियाओं का दोहराव है। बताया गया कि अधिकांश कृषि उपज छोटी-छोटी खेपों और पार्ट लोड के रूप में अलग-अलग वाहनों से गंतव्य तक पहुंचती है।
परिवहन के दौरान कई बार वाहन बदलने की स्थिति बनती है। इससे हर बार जियो टैगिंग में संशोधन करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। वहीं एक ही वाहन में अलग-अलग जिंसों के लिए कई गेट पास जारी होने पर हर गेट पास की अलग जियो टैगिंग करना भी बेहद जटिल और समय लेने वाला कार्य है।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि अधिकांश वाहन चालक तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। उनके पास आवश्यक संसाधनों का भी अभाव रहता है। दुर्घटना, वाहन खराब होने, ट्रांसपोर्ट के माध्यम से माल स्थानांतरित होने या नो-एंट्री के कारण रात और तड़के होने वाली लोडिंग-अनलोडिंग जैसी परिस्थितियों में जियो टैगिंग का पालन करना बेहद कठिन होगा।
व्यापार मंडल अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि जीएसटी प्रणाली में आवश्यक प्रपत्र सरलता से जारी हो जाते हैं, जबकि मंडी परिषद की मौजूदा प्रक्रिया पहले ही जटिल है। ऐसे में जियो टैगिंग की अतिरिक्त अनिवार्यता व्यापार को और कठिन बना रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उपभोक्ता प्रदेश है और बाहर से आने वाले माल पर पहले चरण में ही मंडी शुल्क जमा हो जाता है।
एक सूत्रीय मंडी शुल्क व्यवस्था लागू होने के बावजूद जियो टैगिंग थोपने का कोई औचित्य नहीं है। ज्ञापन सौंपने वालों में राजेंद्र कुमार अग्रवाल, प्रशांत गर्ग, राजेंद्र अग्रवाल, रामशंकर अवस्थी और मोनू अग्रवाल समेत कई व्यापारी शामिल रहे।






