
लखनऊ, 9 जुलाई 2026:
यूपी अपनी ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्थलों के साथ-साथ खानपान को भी पर्यटन की नई पहचान बनाने जा रहा है। लखनऊ की मशहूर चाट और मक्खन मलाई से लेकर बनारसी मिठाइयों तथा बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों तक का स्वाद अब हाईटेक अंदाज में पर्यटकों तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रदेश में तकनीक से लैस डबल डेकर फूड ट्रक शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। ये क्षेत्रीय व्यंजनों, डिजिटल अनुभव और पर्यटन प्रचार का अनूठा संगम होंगे।
लखनऊ को यूनेस्को क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी का दर्जा मिलने के बाद इस परियोजना को और गति मिली है। पहले चरण में ये डबल डेकर फूड ट्रक नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान और डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क में संचालित किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) ने निजी कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 24 जुलाई निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की समृद्ध पाक विरासत को पर्यटन के आकर्षण में बदलना है। उन्होंने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ (ODOC) के माध्यम से हर जिले के पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इसके साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) से जुड़े खाद्य उत्पादों को भी स्थायी पर्यटन मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
इन फूड ट्रकों की खासियत सिर्फ स्वाद नहीं होगी। निचली मंजिल पर आधुनिक किचन में ताजा और स्वच्छ भोजन तैयार किया जाएगा। ऊपरी मंजिल पर पर्यटक ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के जरिए उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों, वन्यजीव स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और पर्यटन सर्किट का वर्चुअल अनुभव ले सकेंगे। डिजिटल हेरिटेज गैलरी, इमर्सिव ऑडियो और एलईडी स्टोरीटेलिंग भी इस अनुभव का हिस्सा होंगे।
पूरी परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है। फूड ट्रकों में सोलर पैनल, AI आधारित सीसीटीवी, डिजिटल पीओएस सिस्टम, QR आधारित फीडबैक, UPI और कार्ड भुगतान, एलईडी सूचना डिस्प्ले तथा बायो-टॉयलेट जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। भोजन पत्तल, बांस, मिट्टी या अन्य बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग में परोसा जाएगा। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज, कचरा पृथक्करण और रोजाना स्वच्छता भी अनिवार्य होगी।
सरकार प्रीमियम पर्यटन स्थल और आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध कराएगी और निजी ऑपरेटर बसों में निवेश, डिजाइन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। सेवा गुणवत्ता की नियमित निगरानी UPETDB करेगा। चयनित ऑपरेटर को शुरुआती 10 वर्ष का संचालन अधिकार मिलेगा जिसे प्रदर्शन के आधार पर अगले 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात के अनुसार यह परियोजना भोजन, तकनीक, विरासत और सतत पर्यटन को एक मंच पर लाने वाला देश का अनोखा मॉडल साबित होगी। इससे स्थानीय रसोइयों, स्वयं सहायता समूहों और क्षेत्रीय खाद्य उद्यमियों के लिए नए रोजगार और बाजार के अवसर भी खुलेंगे।






