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गम में डूबे ईरान ने अपने मुखिया को दी अंतिम विदाई, मशहद में सुपुर्द-ए-खाक हुए अली खामेनेई

ईरान में कई दिनों तक राष्ट्रीय शोक रहा, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी रही, राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, कश्मीर की मस्जिदों और इमामबाड़ों में भी विशेष दुआएं की गईं

न्यूज डेस्क, 10 जुलाई 2026:

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को शुक्रवार तड़के उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। कई दिनों तक चले राष्ट्रीय शोक और अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बाद उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। उनकी अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और देशभर में शोक का माहौल देखने को मिला।

अयातुल्ला अली खामेनेई करीब 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। उनकी मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों में हुई थी। इन्हीं हमलों के बाद ईरान में बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत हुई, जिसने पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित किया।
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खामेनेई की अंतिम यात्रा पिछले सप्ताह शुरू हुई थी। इस दौरान तेहरान, कोम, मशहद समेत कई शहरों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा को देखते हुए कई इलाकों में आवाजाही सीमित की गई, जबकि हवाई क्षेत्र और कई सार्वजनिक गतिविधियों पर भी अस्थायी रोक लगाई गई।

मशहद में खामेनेई को ऐसे स्थान पर दफनाया गया, जहां ईरान के इतिहास के चुनिंदा बड़े शासकों को ही दफनाने की परंपरा रही है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1747 में नादिर शाह को भी इसी शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। इसलिए इस अंतिम संस्कार को ऐतिहासिक नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है।
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अंतिम यात्रा के दौरान हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपने पूर्व नेता को श्रद्धांजलि दी। कई लोगों ने धार्मिक झंडे और पोस्टर लेकर उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया और अलग-अलग चरणों में जनाजे की रस्में पूरी की गईं।

खामेनेई के निधन पर भारत के जम्मू-कश्मीर में भी कई जगह शोक सभाएं आयोजित की गईं। विभिन्न मस्जिदों और इमामबाड़ों में उनकी मगफिरत के लिए विशेष दुआएं की गईं। लोगों ने ईरान की जनता के प्रति संवेदना जताई और क्षेत्र में अमन और शांति की दुआ मांगी।

कश्मीर के कई इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए उन्हें एक प्रभावशाली धार्मिक नेता बताया। कई स्थानों पर लोगों ने उनके योगदान को याद किया और शोक संदेश पढ़े गए। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व को लेकर भी लगातार चर्चा बनी हुई है। वहीं अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर रही।

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