
न्यूज डेस्क,10 जुलाई 2026:
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर एक बार फिर परंपरा और आयोजन की तिथि का विवाद गहरा गया है। पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को दोबारा पत्र भेजकर ISKCON की ओर से निर्धारित तिथि से अलग निकाली जा रही रथयात्राओं और स्नानयात्राओं पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ तिथि बदलने का मामला नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय व्यवस्था से जुड़ा विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
गजपति महाराज ने अपने पत्र में कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सदियों से श्रीक्षेत्र पुरी में तय धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय नियमों के अनुसार आयोजित होती रही है। ऐसे में अलग-अलग तारीखों पर उसी नाम से रथयात्रा और स्नानयात्रा आयोजित करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन, जगन्नाथ संस्कृति के जानकार विद्वानों और कई धार्मिक संस्थाओं की आपत्तियों के बावजूद ISKCON अपने कार्यक्रमों में बदलाव नहीं कर रहा है। यही वजह है कि अब केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई है।
गजपति महाराज ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पहली बार 20 अप्रैल को राष्ट्रपति को इस विषय में लिखा था। इसके अलावा पिछले वर्ष 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को भी इसी मुद्दे पर पत्र भेजकर ध्यान आकर्षित कराया था। उनका कहना है कि अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए दोबारा पत्र लिखना पड़ा।
पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 1 मई से 9 अगस्त के बीच 28 स्थानों पर स्नानयात्रा आयोजित की गई है या प्रस्तावित है। वहीं 2 मई से 5 जुलाई के बीच 45 स्थानों पर निर्धारित तिथि से अलग रथयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। इसके अलावा 11 जुलाई से 4 अक्टूबर के बीच विदेशों में 40 और रथयात्राएं अलग तिथि पर आयोजित होने की योजना है।
गजपति महाराज ने विशेष रूप से इन आगामी 40 रथयात्राओं और 4 स्नानयात्राओं को रोकने की अपील की है। उनका कहना है कि पिछले करीब दो दशकों से श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन, ओडिशा सरकार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस तरह के आयोजनों का विरोध करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विदेशों में अलग तिथि पर कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश और विदेश में भगवान जगन्नाथ के अनेक श्रद्धालु भी इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। कई जगहों पर भक्तों ने ISKCON की स्थानीय इकाइयों को लिखित रूप से आग्रह किया कि रथयात्रा और स्नानयात्रा शास्त्रों में निर्धारित तिथि के अनुसार ही कराई जाए, लेकिन इन मांगों पर अमल नहीं हुआ।
गजपति महाराज का आरोप है कि ISKCON अपनी सुविधा के अनुसार कार्यक्रम तय कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक या संगठनात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और धार्मिक मर्यादा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने यह भी बताया कि सनातन परंपरा के कई प्रमुख धर्माचार्यों, जिनमें शंकराचार्य और वैष्णवाचार्य शामिल हैं, ने भी शास्त्रीय परंपरा के अनुसार ही आयोजन करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद अलग तिथियों पर कार्यक्रम जारी हैं।
गजपति महाराज ने पश्चिम बंगाल के मायापुर स्थित ISKCON मुख्यालय के गवर्निंग बॉडी कमीशन के अध्यक्ष को भी पत्र भेजा है। उसमें विदेशों में निर्धारित तिथि से अलग आयोजित होने वाली रथयात्राओं और स्नानयात्राओं को रोकने के लिए जरूरी निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
अपने पत्र के आखिर में गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अपील की है कि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे। साथ ही ISKCON द्वारा निर्धारित तिथि से अलग आयोजित की जा रही रथयात्राओं और स्नानयात्राओं पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।






