न्यूज डेस्क, 11 जुलाई 2026:
आजकल कम उम्र में Heart Attack और दिल से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए अमेरिका की प्रमुख हृदय संस्थाओं American College of Cardiology (ACC) और American Heart Association (AHA) ने Dyslipidemia Guidelines 2026 जारी की हैं। नई गाइडलाइन में सलाह दी गई है कि 9 से 11 साल की उम्र के हर बच्चे का कम से कम एक बार Cholesterol Test कराया जाए। वहीं 19 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को समय-समय पर Lipid Profile Test कराने की सलाह दी गई है ताकि दिल की बीमारी के खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
बचपन से शुरू हो सकती है दिल की बीमारी
विशेषज्ञों का कहना है कि धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया, जिसे Atherosclerosis कहा जाता है, कई लोगों में बचपन या किशोरावस्था से ही शुरू हो सकती है। अगर किसी बच्चे में जन्मजात High Cholesterol यानी Familial Hypercholesterolemia जैसी समस्या है तो शुरुआती जांच के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है। समय रहते इलाज और Lifestyle में बदलाव से आगे चलकर Heart Attack और Stroke का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सिर्फ Lipid Profile नहीं, इन जांचों पर भी जोर
नई गाइडलाइन में केवल सामान्य Cholesterol Test ही नहीं, बल्कि कुछ दूसरी जांचों को भी अहम माना गया है।
Lipoprotein (a) Test:
यह टेस्ट आनुवंशिक रूप से दिल की बीमारी के खतरे का आकलन करने में मदद करता है। कई लोगों का सामान्य Cholesterol होने के बावजूद Heart Disease का जोखिम ज्यादा हो सकता है, जिसे यह जांच पहचान सकती है।
Apolipoprotein B (ApoB) Test:
Diabetes, Metabolic Syndrome या High Triglycerides से जूझ रहे लोगों के लिए यह जांच ज्यादा उपयोगी मानी गई है। इससे शरीर में नुकसान पहुंचाने वाले Cholesterol कणों की बेहतर जानकारी मिलती है।
Coronary Artery Calcium (CAC) Scan:
जिन लोगों में Heart Disease का खतरा स्पष्ट नहीं होता, उनके लिए यह स्कैन डॉक्टरों को यह तय करने में मदद करता है कि दवा शुरू करने की जरूरत है या केवल Lifestyle में बदलाव से काम चल सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं कम उम्र में Heart Attack के मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती Lifestyle इसकी सबसे बड़ी वजह है। पहले दिल की बीमारी को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब 30 से 40 साल की उम्र के लोगों में भी Heart Attack के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लंबे समय तक बैठे रहना, Physical Activity की कमी, Junk Food और Ultra-Processed Food का ज्यादा सेवन, बढ़ता मोटापा, धूम्रपान, तंबाकू और शराब की आदत, लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और अनियमित दिनचर्या जैसी बातें कम उम्र में ही Cholesterol, Blood Pressure और Blood Sugar को प्रभावित कर रही हैं।
बच्चों की Screening पर क्यों दिया गया खास जोर
नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दिल की बीमारी की रोकथाम अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि बचपन से शुरू होनी चाहिए। अगर 9 से 11 साल की उम्र में Cholesterol Screening की जाए तो ऐसे बच्चों की पहचान जल्दी हो सकती है जिनमें भविष्य में Heart Disease का खतरा ज्यादा है। इससे डॉक्टर समय रहते सही सलाह और इलाज शुरू कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन परिवारों में कम उम्र में Heart Attack या High Cholesterol का इतिहास रहा है, वहां बच्चों की जांच कराना और भी जरूरी हो जाता है।
Healthy Lifestyle ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ जांच कराने से ही काम नहीं चलेगा। Heart Health को बेहतर रखने के लिए रोजाना Exercise, संतुलित भोजन, ताजे फल और हरी सब्जियां, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही धूम्रपान, तंबाकू और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाना दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करता है। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर Health Screening, सही खानपान और सक्रिय Lifestyle अपनाकर Heart Attack और दूसरी Cardiovascular Diseases के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।






