
देहरादून, 12 जुलाई 2026:
देहरादून का परेड ग्राउंड देश की लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प का बड़ा केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने छठे लोक संवर्धन पर्व का आगाज किया। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, उद्यमी और पारंपरिक व्यंजनों से जुड़े विशेषज्ञ अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उद्घाटन के बाद दोनों नेताओं ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया।
यह पहला मौका है जब केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी में इस तरह का आयोजन करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है। इसी वजह से यह महोत्सव सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर भी देखा जा रहा है।
देशभर की लोक कला का सबसे बड़ा संगम
11 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें उत्तराखंड के साथ राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य हिस्सों से आए कारीगर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, कपड़े, लकड़ी और धातु की कलाकृतियां, बांस उत्पाद, घरेलू सजावटी सामान, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों को लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि इससे शिल्पकारों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा और स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार भी तैयार होंगे।

उत्तराखंड को मिली राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड का इस आयोजन में केंद्र सरकार का साझेदार बनना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकारी समन्वय का परिणाम नहीं बल्कि इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं और जनहित के कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की भूमिका की सराहना करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
लोक संस्कृति से जुड़ेगा युवा, मजबूत होगी Local Economy
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराएं, भाषाएं और हस्तशिल्प हैं। ऐसे आयोजन केवल संस्कृति को बचाने का काम नहीं करते बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और कारीगरों को नए अवसर भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि आज Digital Market और Online Platform के दौर में ऐसे आयोजन स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद कर रहे हैं। इससे Local Economy मजबूत होगी और हजारों परिवारों की आय बढ़ेगी।

कारीगरों को मिलेगा बड़ा बाजार
धामी ने कहा कि लंबे समय से पारंपरिक शिल्प और लोक कला से जुड़े कारीगरों को बाजार तक पहुंच बनाने में दिक्कत होती रही है। ऐसे आयोजनों के जरिए उन्हें सीधे खरीदारों से मिलने का मौका मिलता है। इससे उनकी कला को पहचान मिलने के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ती है। उन्होंने भरोसा जताया कि लोक संवर्धन पर्व उत्तराखंड समेत पूरे देश के शिल्पकारों, हस्तशिल्पियों और युवा उद्यमियों के लिए नए कारोबार और रोजगार के अवसर तैयार करेगा।

अल्पसंख्यक समाज के लिए सरकार की योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्ति, मेधावी बालिका प्रोत्साहन, कौशल विकास, स्वरोजगार, शिक्षा ऋण, मुख्यमंत्री हुनर योजना और अल्पसंख्यक क्षेत्रों के विकास जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में युवाओं को मिल रहा है। इसके अलावा मदरसों में आधुनिक तकनीक और आईटी आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थी बदलते समय के साथ आगे बढ़ सकें।
House of Himalayas और ODOP से बढ़ेगी पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार House of Himalayas और One District One Product (ODOP) जैसी योजनाओं के जरिए उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को देश और विदेश के बाजार तक पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के पारंपरिक उत्पाद, जैविक खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प और स्थानीय कला को नई पहचान दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों और देवभूमि आने वाले पर्यटकों से अपील की कि वे लोक संवर्धन पर्व में पहुंचकर स्थानीय उत्पाद खरीदें, जिससे कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ मिले।
रिजिजू बोले, संस्कृति और कारीगरों का राष्ट्रीय उत्सव
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल प्रदर्शनी नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कौशल का राष्ट्रीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगरों को एक मंच पर लाकर उनकी कला को पहचान देने का यह बड़ा प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कला और अल्पसंख्यक समुदाय के कारीगरों को राष्ट्रीय और Global Market से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
PM VIKAS योजना से मिल रहे नए अवसर
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन यानी PM VIKAS योजना के तहत शिल्पकारों और कारीगरों को प्रशिक्षण, Marketing, Branding और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कला को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में नहीं बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता के मजबूत माध्यम के तौर पर भी विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उत्तराखंड सरकार का सहयोग सराहनीय है।

उत्तराखंड मॉडल की हुई सराहना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्र सरकार के साथ साझेदारी करने वाला पहला राज्य बनकर उत्तराखंड ने नई मिसाल पेश की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दूसरे राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे और स्थानीय कला व शिल्प को बढ़ावा देंगे।
पौधरोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और जनभागीदारी से वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने का संदेश भी दिया गया।

ये खास लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, संयुक्त सचिव एसपी रॉय, विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते, विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।






