
प्रमोद पासी
उन्नाव, 12 जुलाई 2026:
देश की सेवा करने का सपना लेकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) पहुंचे 17 वर्षीय कैडेट अभिनव बाजपेई का सफर बेहद कम उम्र में ही थम गया। रविवार को उन्नाव के शुक्लागंज स्थित नेहरू नगर में उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो पूरे इलाके की आंखें नम हो गईं। हजारों लोगों ने अंतिम दर्शन किए, जबकि राजपूताना राइफल्स के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शस्त्र सलामी देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
ट्रेनिंग के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के नेहरू नगर निवासी अभिनव बाजपेई का चयन इसी साल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला (पुणे) में हुआ था। 22 जून को वह घर से ट्रेनिंग के लिए रवाना हुए थे। 24 जून से शुरू हुई फर्स्ट टर्म ट्रेनिंग के दौरान नियमित PT के समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इलाज के प्रयास किए गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। सेना के अधिकारियों ने घटना की जानकारी परिजनों को दी, जिसके बाद शुक्रवार को माता-पिता पुणे के लिए रवाना हो गए थे।

घर पहुंचा पार्थिव शरीर, उमड़ पड़ा जनसैलाब
रविवार सुबह सेना के वाहन से अभिनव का पार्थिव शरीर लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट लाया गया। वहां से उसे शुक्लागंज स्थित उनके घर पहुंचाया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मोहल्ले से लेकर आसपास के इलाकों तक हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी कि देश का एक होनहार बेटा बहुत जल्दी चला गया।

सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
मिश्रा कॉलोनी स्थित मुक्ता घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। राजपूताना राइफल्स के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शस्त्र सलामी देकर अभिनव को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने नम आंखों से वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

पढ़ाई में भी हमेशा रहे अव्वल
अभिनव के चाचा विजय शंकर बाजपेई ने बताया कि बचपन से ही उसका सपना भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था। उसने कानपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय लखनऊ कैंट से पढ़ाई की थी। 10वीं में 95 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। इंटर पास करने के बाद इसी साल उसने NDA ज्वॉइन किया था। परिवार को पूरा भरोसा था कि एक दिन वह अधिकारी बनकर देश का नाम रोशन करेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
इकलौता बेटा था, बहन भी कर रही तैयारी
अभिनव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उनकी मां सीमा बाजपेई गृहिणी हैं। छोटी बहन अर्चिका भी कानपुर में रहकर NDA की तैयारी कर रही है। बेटे के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर से कुछ दिन पहले देश सेवा के सपनों के साथ बेटा निकला था, उसी घर में रविवार को तिरंगे में लिपटा उसका पार्थिव शरीर लौटा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
जनप्रतिनिधियों और शहर के लोगों ने जताया शोक
अंतिम संस्कार में सदर विधायक पंकज गुप्ता, भाजपा नेता गोल्डी गुप्ता समेत शहर के कई गणमान्य लोग पहुंचे। सभी ने शोक व्यक्त करते हुए परिवार को ढांढस बंधाया। इलाके के लोगों का कहना था कि अभिनव की मेहनत और लगन दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा थी।






