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पेपर लीक पर सरकार जवाब दे : दिल्ली से लखनऊ तक सत्याग्रह के बाद इको गार्डन में गरजे छात्र, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

आइसा के बैनर तले प्रदर्शन, शिक्षा पर 10% बजट, एनटीए खत्म करने, समयबद्ध भर्ती, मुफ्त शिक्षा और पेपर लीक पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ मुआवजे की उठी मांग

लखनऊ, 12 जुलाई 2026:

दिल्ली से लखनऊ तक सत्याग्रह पदयात्रा पूरी करने के बाद युवा कार्यकर्ता लकी मौर्य और मनीष मौर्य रविवार को इको गार्डन पहुंचे और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के साथ प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में पेपर लीक, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, शिक्षा पर घटते सार्वजनिक खर्च तथा विद्यार्थियों और प्रतियोगी अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाबदेही की मांग उठाई गई।

आंदोलनकारियों ने बताया कि यह पदयात्रा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में निकाली गई। उनका आरोप है कि पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और बढ़ते मानसिक-आर्थिक दबाव के कारण 20 से अधिक छात्रों की मौतें हुई हैं। इन्हें उन्होंने संस्थानिक हत्याएं करार देते हुए न्याय और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
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आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा कि पेपर लीक केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर कर परीक्षा और कोचिंग को बाजार बनाने की राजनीति का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रश्नपत्र बिकते हैं। भर्तियां वर्षों तक लटकती हैं और रिक्त पद नहीं भरे जाते तब मेरिट का दावा अर्थहीन हो जाता है।

प्रदेश उपाध्यक्ष समर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लाखों युवा वर्षों से पेपर लीक, अनियमित परीक्षाओं और लंबित भर्तियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार देने के बजाय युवाओं का भविष्य टाल रही है। लकी और मनीष की पदयात्रा इसी व्यापक आक्रोश की आवाज है।

मनीष मौर्य ने कहा कि हर पेपर लीक के साथ लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत, परिवारों की जमा-पूंजी और सपने बर्बाद हो जाते हैं। लकी मौर्य ने कहा कि किसी परीक्षा के रद्द होने या लटकने का असर विद्यार्थी के साथ पूरे परिवार पर पड़ता है जिसने बेहतर भविष्य की उम्मीद में त्याग और आर्थिक संघर्ष किया होता है।

प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा पर केंद्र और राज्यों द्वारा मिलाकर कुल बजट का 10 प्रतिशत खर्च करने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को समाप्त कर यूपीएससी की तर्ज पर स्वतंत्र संवैधानिक परीक्षा संस्थाओं के गठन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा शिक्षा क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले व्यक्ति को मंत्री बनाए जाने की मांग की।

इसके अलावा टीजीटी, पीजीटी सहित सभी शिक्षक भर्तियां हर वर्ष कराने, छह माह में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने, कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा लागू करने, प्राथमिक शिक्षकों को बीएलओ और चुनावी ड्यूटी से मुक्त करने तथा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा बचाने की लड़ाई में विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज से एकजुट होने का आह्वान किया।

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