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फिर साथ दिखे योगी-त्रिवेंद्र, गोबर आधारित नवाचार बताया एजेंडा, राजनीतिक कयासों को भी मिली हवा

गोबर आधारित वैज्ञानिक नवाचार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हुई चर्चा, लेकिन लगातार हो रही मुलाकातों ने उत्तराखंड की राजनीति में नए कयासों को हवा दी, 2027 विधानसभा चुनाव और भाजपा के अंदरूनी समीकरणों से भी जोड़कर देखी जा रही मुलाकात

योगेंद्र मलिक

देहरादून/लखनऊ, 13 जुलाई 2026:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत की लखनऊ में हुई मुलाकात ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आधिकारिक तौर पर बैठक का एजेंडा गोबर आधारित वैज्ञानिक नवाचार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

सांसद के साथ प्रख्यात वैज्ञानिक भी रहे, ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल पर हुआ मंथन

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त्रिवेंद्र रावत के मुताबिक मुलाकात में देश के प्रख्यात वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया। गोबर से ऊर्जा, जैविक उत्पाद, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बात पर जोर दिया गया कि पशुधन आधारित जैव-अर्थव्यवस्था प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस दौरान ग्रामीण विकास को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग, जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण पर भी विस्तार से मंथन हुआ। वैज्ञानिकों ने गोबर आधारित उद्योगों के जरिए गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के कई मॉडल प्रस्तुत किए।

उत्तराखंड सरकार के कुछ फैसलों पर असहमति जता चुके हैं त्रिवेंद्र रावत

हालांकि, राजनीतिक चर्चा का केंद्र बैठक का एजेंडा नहीं बल्कि योगी आदित्यनाथ और त्रिवेंद्र सिंह रावत की लगातार बढ़ती नजदीकी रही। गढ़वाल से निकटता रखने वाले दोनों नेताओं की कई मुलाकातें हो चुकी हैं और लगभग हर दो-तीन महीने में होने वाली इन बैठकों को उत्तराखंड भाजपा की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्य के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात केवल औपचारिक बैठक नहीं मानी जा रही। योगी आदित्यनाथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यों की खुलकर सराहना कर चुके हैं। दूसरी ओर त्रिवेंद्र रावत भी कई बार उत्तराखंड सरकार की कुछ नीतियों और फैसलों पर अपनी असहमति सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। इसी वजह से यह मुलाकात राजनीतिक विश्लेषकों के लिए दिलचस्प बन गई है।

विकास से अधिक राजनीति में भविष्य की रणनीति बनाने पर चर्चाएं तेज

भाजपा के भीतर इसे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में सामान्य बैठक बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष और राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के नजरिए से भी देख रहे हैं। उत्तराखंड में नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर समय-समय पर उठने वाली चर्चाओं के बीच इस मुलाकात ने नए कयासों को जन्म दिया है।

भले ही दोनों नेताओं की ओर से इस मुलाकात को पूरी तरह विकास और किसानों के हितों से जुड़ी पहल बताया गया हो, लेकिन उत्तराखंड की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे केवल विकास संबंधी बैठक मानने को लेकर राजनीतिक हलकों में सहमति नहीं दिख रही। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि दोनों नेताओं की ऐसी बैठकों का सिलसिला जारी रहता है तो उत्तराखंड भाजपा की राजनीति में इसके दूरगामी संकेत भी देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल आधिकारिक तौर पर बैठक का केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक नवाचार और आत्मनिर्भर भारत का विजन रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात की चर्चा विकास से अधिक भविष्य की रणनीति और संभावित राजनीतिक संदेश को लेकर हो रही है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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