लखनऊ, 19 जुलाई 2026:
यूपी में अब प्राथमिक शिक्षा का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि बच्चे ने पाठ्यक्रम कितना पूरा किया बल्कि इस बात पर होगा कि उसने वास्तव में कितना सीखा। योगी सरकार ने बुनियादी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और दक्षता आधारित बनाने के लिए निपुण भारत मिशन के विस्तार की व्यापक कार्ययोजना लागू की है। बालवाटिका से कक्षा-5 तक लागू होने वाली इस व्यवस्था में हर बच्चे के सीखने के स्तर, उसकी प्रगति और सामने आ रही कमियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और डीएम को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। नई कार्ययोजना का उद्देश्य बुनियादी शिक्षा को महज पाठ्यक्रम पूरा कराने की प्रक्रिया से बाहर निकालकर हर बच्चे की वास्तविक सीखने की क्षमता पर केंद्रित करना है। इसके जरिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने की रणनीति अपनाई गई है।
हर कक्षा और विषय के लिए तय होंगे सीखने के लक्ष्य
कार्ययोजना के तहत कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार और कक्षावार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। इन लक्ष्यों का निर्धारण राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों और परख के मानकों के अनुरूप किया जाएगा। एससीईआरटी, डायट, विषय विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता से इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा जिससे पूरे प्रदेश में सीखने के परिणामों को लेकर एक समान गुणवत्ता व्यवस्था विकसित हो सके।
लर्निंग गैप की तुरंत होगी पहचान
नई व्यवस्था में बच्चों की प्रगति का नियमित आकलन अनिवार्य होगा। फॉर्मेटिव असेसमेंट और अन्य शैक्षणिक मूल्यांकन के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कौन सा बच्चा किस स्तर पर है। जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप मिलेगा उनके लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा निर्धारित सीखने के स्तर से पीछे न रह जाए।
शिक्षकों को मिलेगा नई शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण
इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शिक्षक होंगे। गतिविधि आधारित और दक्षता आधारित शिक्षण, टीएलएम, डिजिटल संसाधनों तथा दीक्षा प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। निपुण संकल्प कार्यशालाओं के माध्यम से उन्हें नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
इसके साथ ही बालवाटिका में स्कूल रेडीनेस, पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, पढ़ने की संस्कृति और अभिभावकों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। राज्य से लेकर विद्यालय स्तर तक नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा होगी, ताकि निपुण भारत मिशन का लाभ हर बच्चे तक पहुंच सके।






