न्यूज डेस्क, 25 जुलाई 2026:
नीट पेपर लीक मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत करार दिया है। शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जो सीधे सड़कों से निकली है। उन्होंने कहा कि यह शांति, धैर्य और अडिग संकल्प की जीत है।
उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और देश की जेन जी (Gen Z) को बधाई देते हुए उन सभी नागरिकों का भी आभार जताया, जिन्होंने भय और दबाव से ऊपर उठकर देश के हर कोने से अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जवाबदेही से अब सुधार की ओर’ शब्दों के साथ किया।
सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 26 दिनों से आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने हुए थे। उन्होंने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के मंच से आमरण अनशन शुरू किया था। उनका प्रमुख आग्रह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने का था। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात कर उनका अनशन समाप्त कराया था।

उधर, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने भी एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि भारत की जेन जी ने यह साबित कर दिया कि विश्वगुरु होने का वास्तविक अर्थ क्या है। उनके अनुसार इन युवाओं ने सनातन मूल्यों का केवल उपदेश नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने आचरण में उतारा। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने दिखाया कि नफरत के बिना भी साहस दिखाया जा सकता है, हिंसा के बिना भी मजबूती दिखाई जा सकती है और अंधभक्ति के बिना भी सच्ची देशभक्ति निभाई जा सकती है।
गीतांजलि ने आगे लिखा कि दुनिया के कई देशों के युवाओं की तुलना में भारतीय युवाओं ने यह उदाहरण पेश किया कि बिना अपने देश को नुकसान पहुंचाए भी अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ा हुआ जा सकता है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भी इन युवाओं से हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और विश्वगुरु होने का वास्तविक अर्थ सीखने का प्रयास करे।
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर करीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन जारी था जिसमें सोनम वांगचुक का 26 दिन का भूख हड़ताल आंदोलन सबसे चर्चित रहा।






