
नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026:
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के उन जजों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए नया निर्देश जारी किया है, जिनके Tax Return न्यायिक भत्ते (Judicial Allowance) से जुड़े विवाद के दायरे में हैं। कोर्ट ने कहा है कि संबंधित जजों का PAN समेत कुछ जरूरी ब्योरा आयकर विभाग को उपलब्ध कराया जाए, ताकि केवल उन्हीं रिटर्न की प्रोसेसिंग रोकी जाए जिन पर मामला लंबित है। इससे आम टैक्सपेयर्स के रिटर्न प्रभावित नहीं होंगे।
18 अगस्त तक देनी होगी यह जानकारी
10 अगस्त को पारित आदेश में डिवीजन बेंच ने संबंधित जजों के निजी सचिवों को ईमेल के जरिए तय अधिकारी को जानकारी भेजने का निर्देश दिया है। इसमें जज का नाम, असेसमेंट ईयर, PAN नंबर, टैक्स रिटर्न दाखिल करने की तारीख, रिटर्न का एकनॉलेजमेंट नंबर शामिल होगा। यदि बाद में नया या संशोधित रिटर्न दाखिल किया जाता है तो उसकी सूचना 12 घंटे के भीतर देनी होगी।
कोर्ट को क्यों बदलना पड़ा आदेश
इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले जिन जजों ने कुछ भत्तों को टैक्स योग्य आय नहीं माना है, उनके टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग फिलहाल रोकी जाए। सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने बताया कि रिटर्न की प्रोसेसिंग पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक और केंद्रीकृत सिस्टम से होती है। सिस्टम यह पहचान नहीं कर सकता कि कौन सा रिटर्न मौजूदा जज का है। ऐसे में सभी रिटर्न रोकने से आम करदाताओं को भी परेशानी हो सकती है। इसी वजह से कोर्ट ने पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करने का निर्देश दिया।
फिलहाल नहीं होगी रिटर्न की प्रोसेसिंग
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन जजों की पहचान इस प्रक्रिया से हो जाएगी, उनके टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग फिलहाल रोक दी जाएगी। जिन मामलों में पहले ही टैक्स डिमांड जारी हो चुकी है, उस पर भी अंतिम फैसला आने तक रोक रहेगी। साथ ही विवाद खत्म होने तक संबंधित रिटर्न पर रिफंड भी जारी नहीं किया जाएगा। हालांकि पहले से जारी रिफंड का फैसला अंतिम निर्णय के आधार पर होगा।

जानें क्या है पूरा Tax विवाद
मामला जजों को मिलने वाले कुछ भत्तों पर टैक्स लगाने से जुड़ा है। सितंबर 2025 में CBDT ने एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी कर नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले जजों के कुछ भत्तों के टैक्स ट्रीटमेंट को स्पष्ट किया था। इसमें सरकारी आवास, यात्रा सुविधा, आतिथ्य भत्ता समेत कुछ अन्य सुविधाएं शामिल थीं। दिल्ली टैक्स बार एसोसिएशन ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। एसोसिएशन का कहना है कि ये सुविधाएं सामान्य टैक्स छूट या कटौती की श्रेणी में नहीं आतीं, क्योंकि जजों के वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े कानून में इनके लिए अलग व्यवस्था है।
3 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर तय की है। तब तक संबंधित जजों की पहचान के आधार पर केवल उन्हीं टैक्स रिटर्न पर रोक रहेगी जो इस विवाद के दायरे में आते हैं।






