
लखनऊ, 11 अगस्त 2026:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यपाल के कार्यकाल और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की कुलपति की दोबारा नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मंत्री एवं अपनी जनता पार्टी के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य ने इन दोनों मामलों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए संवैधानिक और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष का होता है। ऐसे में पांच वर्ष पूरे होने के बाद भी सात वर्ष तक पद पर बने रहने का मामला गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति से संबंधित कोई स्पष्ट आदेश नहीं है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं, KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की दोबारा नियुक्ति को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़ा किया। मौर्य के मुताबिक कुलपति पर भ्रष्टाचार और आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए थे। इसके बावजूद उनकी दोबारा नियुक्ति कर दी गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियुक्तियों में नियमों और संविधान का पालन नहीं होगा तो SC/ST/OBC समाज को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा? उनके बयान के बाद दोनों मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।






