
लखनऊ, 11 सितंबर 2026:
यूपी को अधिक सुरक्षित और आपदारोधी राज्य बनाने की दिशा में 18 सितंबर को राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश के 34 जिलों की 157 तहसीलों में एक साथ होने वाले इस अभ्यास में भूकंप, रासायनिक रिसाव और आग जैसी गंभीर आपदाओं के बीच सरकारी तंत्र की वास्तविक तैयारियों का परीक्षण होगा। सिर्फ कागजी तैयारी नहीं अपितु मौके पर खोज एवं बचाव, सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, राहत और विभागीय समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।
मेगा अभ्यास से पहले उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से लखनऊ में दो दिवसीय संगोष्ठी एवं टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं और आपदा प्रतिक्रिया बलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पहले दिन भूकंप, औद्योगिक यानी रासायनिक और अग्नि आपदाओं से जुड़े पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अनुभव, तकनीकी जानकारी और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा कीं। अग्नि और औद्योगिक आपदाओं के विभिन्न मामलों का अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया।
‘आपदा आए तो हर सेकेंड की कीमत’
उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने कहा कि ऐसे अभ्यासों का मकसद राज्य, मंडल और जिला स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक समय में कार्यक्षमता जांचना, कमियां पहचानना और उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करना है। उन्होंने एकीकृत, त्वरित और प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अर्पणा यू ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल हादसे के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली लक्ष्य आपदा से पहले जोखिम कम करना और समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की एडीजी पद्मजा चौहान ने प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया बलों की क्षमताओं को एकीकृत करने पर जोर दिया।

पीएसी के आईजी डॉ. आलोक सिंह ने कहा कि आपदा के समय हर सेकेंड महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एजेंसियों की भूमिका, कमान एवं नियंत्रण व्यवस्था और संसाधनों की उपलब्धता पहले से स्पष्ट और समन्वित होना जरूरी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सदस्य रीना सिंह ने उत्तर प्रदेश को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में बताया।
मेज पर बनेगा ‘आपदा का मैदान’, फिर 34 जिलों में असली परीक्षा
दूसरे दिन टेबल टॉप एक्सरसाइज में भूकंप, रासायनिक रिसाव और आग के अलग-अलग परिदृश्य बनाकर जिलों, विभागों और आपदा प्रतिक्रिया बलों की निर्णय लेने की क्षमता, कमान एवं नियंत्रण और आपसी समन्वय को परखा जाएगा। भूकंप के बाद की तत्काल कार्रवाई, स्कूलों, अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति, जहरीली गैस के रिसाव, तरल रसायन फैलने और अस्पतालों, स्कूलों तथा बहुमंजिला इमारतों में आग जैसे हालात पर अभ्यास होगा।
18 सितंबर को जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और घटना प्रतिक्रिया दल सक्रिय किए जाएंगे। जिलों में क्षेत्रीय अस्पताल बनाकर बड़ी संख्या में घायलों के तत्काल उपचार, निकासी और दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था भी परखी जाएगी।
क्षतिग्रस्त इमारतों से लोगों को निकालने, मलबे में खोज एवं बचाव, आग, गैस और रासायनिक रिसाव जैसी स्थितियों का व्यावहारिक अभ्यास होगा। भारतीय रेल भूकंप के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने की स्थिति का भी विशेष अभ्यास करेगा। पूरे मेगा एक्सरसाइज की राज्य स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निगरानी और कमान एवं नियंत्रण किया जाएगा।






