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दिल्ली में BRICS Summit का आगाज, मोदी-पुतिन की मुलाकात से कई रक्षा सौदों पर लग सकती है मुहर

भारत मंडपम में आज से शुरू हो रहा सम्मेलन, रूस के राष्ट्रपति शामिल होने के लिए पहुंचे, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग सात साल बाद आएंगे भारत, ग्रुप के अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी होंगे शामिल

न्यूज डेस्क, 11 सितंबर 2026:

ब्रिक्स सम्मेलन भारत की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गया है। यह 13 सितंबर तक चलेगा। इस ग्रुप से जुड़े देशों के शीर्ष नेता सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, आपसी सहयोग, व्यापार, राजनीति और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसमें शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत इस सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके अलावा अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी इसमें शामिल होने आ रहे हैं। इस ग्रुप में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। यह ग्रुप प्रमुख उभरते हुए बाजारों व विकासशील देशों का एक इंटरनेशनल ग्रुप है।

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ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच आज फाइटर जेट की डील पर समझौता होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुतिन से मुलाकात होगी। बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच भारत में एसयू-57 के प्रोडक्शन और तकनीक साझा करने को लेकर विचार-विमर्श हो सकता है। इससे पहले 20216 में गोवा में हुए ब्रिक्स समिट में दोनों देशों में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर सहमति बनी थी। इस बार भी रूस-भारत के बीच रक्षा सहयोग का मुद्दा मुख्य हो सकता है। भारत व रूस के बीच एस-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मामले पर बात हो सकती है। यही नहीं एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी चर्चा होनी की उम्मीद है। सुपर सुखोई योजना के तहत इनमें बेहतर रडार की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही नए हथियार भी लगाए जाएंगे।

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इसके अलावा भारत में रूसी तकनीक से नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने पर भी दोनों देशों में बातचीत हो सकती है। भारत-रूस डॉलर की जगह रुपये व रूबल में कारोबार करना चाहते हैं। इससे दोनों देशों के बीच पेमेंट की प्रकिया आसान होगी। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) व चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को लेकर चर्चा कर सकते हैं। इंटरनेशनल नॉर्थ-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। यह 7,200 किलोमीटर लंबा एक बहु-तरीका परिवहन नेटवर्क है जो जहाज, रेल और सड़क मार्गों को आपस में जोड़ता है। यह भारत, ईरान और रूस की पहल पर 12 सितंबर 2000 को शुरू किया गया था। वहीं, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत व रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय कम हो सकता है। यह करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन किया जा सकता है।

ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पीएम मोदी से मुलाकात होगी। 2020 के गलवान संघर्ष और एलएसी पर चाल साल लंबी तनातनी के बाद पहली बार दोनों देशों के नेता एक साथ बैठकर अपने रिश्तों की नई जमीन को लेकर चर्चा करेंगे। दोनों देश एलएसी से कारोबार तक छह मोर्चों पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सबसे अहम मुद्दा सीमा विवाद पर विशेषज्ञ समूह बनाने का है। बता दें कि दोनों देश सीमा पर दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क सेंटर बनाने व पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमत हैं। इस प्रक्रिया को दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की तरफ से मंजूरी मिसल सकती है। दूसरा मुद्दा भारत-चीन के बीच कारोबार का हो सकता है। भारत के सामान को चीन के बाजार में ज्यादा पहुंच मिले और सप्लाई चेन राजनीतिक तनाव से बेअसर रहे इसको लेकर मोदी-जिनपिंग के बीच बातचीत हो सकती है।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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