
लखनऊ, 17 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में करीब आठ साल बाद अदालत का फैसला आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में आरोपी लखनऊ पुलिस के सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया। अदालत ने प्रशांत के खिलाफ हत्या की धारा 302 के आरोप को हटाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 304(2) के तहत दोषी माना है। अब अदालत 21 सितंबर को प्रशांत की सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।
फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट में विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी भी मौजूद थीं। फैसला आते ही उनकी आंखें भर आईं और वह फफक पड़ीं। परिवार ने अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
आधी रात कार रोकने से शुरू हुआ था विवाद
यह मामला 29/30 सितंबर 2018 की देर रात करीब 1:30 बजे गोमतीनगर विस्तार इलाके में सामने आया था। एप्पल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ कार से लौट रहे थे। मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास गश्त कर रहे सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया।
अभियोजन के मुताबिक कार नहीं रुकने पर पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया। इसी दौरान प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। गोली विवेक को लगी और कार डिवाइडर से टकरा गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया था।

एसआईटी जांच से कोर्ट तक पहुंचा मामला
हत्याकांड के बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित की गई। जांच के दौरान गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया। इसके बाद जिला अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
मुकदमे के दौरान विवेक की सहकर्मी सना का बयान भी दर्ज हुआ जबकि पत्नी कल्पना तिवारी समेत अन्य गवाहों ने अदालत के सामने अपनी बात रखी। चिकित्सकों और जांच अधिकारियों के बयान भी रिकॉर्ड किए गए। मुकदमे की अंतिम बहस गत छह अगस्त को पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाया।

देशभर में गूंजी थी ये घटना
विवेक तिवारी की मौत ने उस समय पूरे देश में पुलिस की कार्यप्रणाली और बल प्रयोग को लेकर बहस छेड़ दी थी। राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन हुए और मामले में पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठे। करीब आठ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराए जाने के बाद अब सबकी नजर 21 सितंबर को होने वाली सजा पर टिकी है।






