
लखनऊ, 28 सितंबर 2026:
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ अब छात्र संगठन भी सड़क पर उतर आए हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में सोमवार को संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले छात्रों ने मार्च निकालकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए। छात्रों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने के साथ SIR पर तत्काल रोक लगाने और चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
विश्वविद्यालय परिसर से निकला छात्रों का मार्च गेट नंबर-3 पर पहुंचा, जहां प्रतिवाद सभा आयोजित की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का मुद्दा उठाया
प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के भीतर विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। छात्रों के मुताबिक इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल ढांचे के नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।

छात्रों ने दावा किया कि Form 6 से जुड़े कुछ बदलावों को दोनों चुनाव आयुक्तों ने आंतरिक तौर पर ‘illegal’ और ‘unauthorised’ बताया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि चुनाव आयोग के भीतर ही प्रक्रियाओं और फैसलों को लेकर इस तरह के सवाल उठे हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
‘जांच पूरी होने तक SIR रोका जाए’
आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से बार-बार लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने के बाद इन सवालों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पर किसी भी तरह का संदेह सीधे नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित कर सकता है। छात्रों ने मांग की कि जांच पूरी होने तक SIR पर रोक लगाई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के महासचिव शुभम खरवार ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटना गंभीर विषय है। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े सवालों की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच तथा दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की।
एससीएस के उपाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी नागरिक को मनमानी या अस्पष्ट प्रक्रिया के कारण अपने अधिकार से वंचित न होना पड़े। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता चाहते हैं।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के बाद छात्र संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने, SIR पर तत्काल रोक लगाने, चुनाव आयोग के विवादित निर्णयों और मतदाता डेटाबेस की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि किसी आपराधिक कृत्य के प्रमाण सामने आते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ गिरफ्तारी और अभियोजन समेत कानून के तहत कार्रवाई की जाए।






