
लखनऊ, 1 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी के कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार में बुधवार को साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खास शाम सजी। मौका था ‘एक शाम आबिद सुरती के नाम’ कार्यक्रम का, जहां मशहूर लेखक, व्यंग्यकार, चित्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आबिद सुरती के बहुआयामी रचनात्मक सफर पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वेदा ने आबिद सुरती के व्यक्तित्व और कृतित्व के परिचय से की। उन्होंने कहा कि आबिद सुरती ने साहित्य और कला के अलग-अलग माध्यमों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी रचनात्मकता महज मनोरंजन तक सीमित नहीं रही अपितु आम आदमी की जिंदगी और समाज से जुड़े सवालों को भी लगातार सामने लाती रही है।
इसके बाद आबिद सुरती ने अपने लेखन और रचनात्मक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी साहित्यिक यात्रा को किन अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों ने दिशा दी। बातचीत के दौरान उन्होंने साहित्य और कला की समाज के प्रति जिम्मेदारी पर भी अपने विचार रखे। उनके अनुभवों और बेबाक संवाद ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन प्रलेस-इप्टा लखनऊ की इरानाथ श्रीवास्तव ने किया। इप्टा के प्रांतीय महासचिव शहज़ाद रिजवी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूप रेखा वर्मा, साहित्यकार शकील सिद्दीकी, हरि चरण प्रकाश, कौशल किशोर, नागेंद्र, तस्वीर नकवी, सईदा सायरा, प्रदीप घोष, ऋषि श्रीवास्तव, डॉ. आवंतिका सिंह, राकेश वर्मा, मुख्तार अहमद, रिजवान अली समेत बड़ी संख्या में संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे।






