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UPSC के 100 साल पर PM मोदी का बड़ा संदेश, बोले – समय पर हों परीक्षा, भर्ती में देरी से प्रभावित होता है भविष्य

UPSC Centenary Celebration : भारत मंडपम में दो दिन के समारोह का समापन, पीएम ने दिया बदलते भारत के हिसाब से Recruitment System में सुधार पर जोर, Nation First और Citizen First को बताया चयन की दो अहम कसौटियां, नागरिक सेवा को सबसे ऊपर रखने की जरूरत, 2047 का भारत आज से होगा काफी अलग, युवाओं की बढ़ती उम्मीदों के मुताबिक बदलनी होगी Civil Services की कार्यसंस्कृति

न्यूज डेस्क, 1 अक्टूबर 2026:

संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सिर्फ एक संस्था की शताब्दी नहीं, बल्कि उस विरासत का भी उत्सव है, जिससे देश के लाखों युवा हर साल जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि UPSC को लेकर देश के लोगों का भरोसा इसकी सबसे बड़ी पूंजी है।

भर्ती प्रक्रिया सिर्फ ज्ञान की परीक्षा न हो

प्रधानमंत्री ने कहा कि Public Services में ऐसे युवाओं को लाने की जरूरत है जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों। उनके मुताबिक भर्ती परीक्षा में केवल यह नहीं देखा जाना चाहिए कि Candidate को कितना पता है, बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि वह Civil Services में क्यों आना चाहता है। यानी चयन प्रक्रिया में ज्ञान के साथ सेवा की सोच को भी महत्व देने की जरूरत है।

Nation First और Citizen First

PM मोदी ने कहा कि भर्ती और चयन से जुड़े फैसलों के लिए दो कसौटियों को हमेशा याद रखना चाहिए। पहली कसौटी Nation First और दूसरी Citizen First है। उन्होंने नागरिक सेवा को केंद्र में रखते हुए कहा कि सरकार की कार्यसंस्कृति का मूल आधार Pro-People, Pro-Active और Good Governance होना चाहिए।

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नागरिक देवो भव का मंत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सेवा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए नागरिक देवो भव का मंत्र सामने रखा। इसका मतलब है कि सरकारी व्यवस्था में नागरिक को सबसे अहम स्थान दिया जाए और Public Service को सिर्फ पद या अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि लोगों की सेवा की जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाए।

समय पर परीक्षा पूरी करने पर जोर

PM मोदी ने भर्ती परीक्षाओं की समयबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी का सीधा असर युवा उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को बदलती जरूरतों के साथ खुद को ढालना होगा और समय की निश्चितता को भर्ती प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाना होगा।

2047 का भारत आज से काफी अलग होगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से काफी अलग होगा। आने वाले वर्षों में देश ज्यादा शहरी होगा, गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होगा और खासकर युवाओं की उम्मीदें व आकांक्षाएं और बढ़ेंगी। ऐसे बदलावों के बीच Public Service को भी अपनी कार्यशैली बदलनी होगी।

Instant Delivery के दौर में बदलें काम करने का तरीका

उन्होंने कहा कि आज का नागरिक ऐसी दुनिया में रह रहा है जहां सेवाओं की डिलीवरी तेजी से हो रही है। ऐसे में Public Service को भी Instant Delivery वाली दुनिया की रफ्तार के साथ तालमेल बैठाना होगा। इसका मतलब सरकारी व्यवस्था में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जिसमें लोगों की जरूरतों को समझकर समय पर सेवाएं दी जा सकें।

UPSC की शुरुआत 1926 में हुई थी

UPSC की संस्थागत यात्रा 1 अक्टूबर 1926 से शुरू हुई थी। इसी दिन भारत में पहला Public Service Commission बनाया गया था। शुरुआत में यह एक सलाहकार संस्था थी और इसके चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति लंदन में Secretary of State करता था। बाद में आयोग के ढांचे, दर्जे और जिम्मेदारियों में लगातार बदलाव हुए और स्वतंत्र भारत में यह संवैधानिक संस्था के रूप में विकसित हुआ।

Merit से शुरू हुआ था Public Service का सफर

भारत में सरकारी सेवाओं में Merit आधारित चयन की औपचारिक शुरुआत इससे पहले 1855 में Indian Civil Service परीक्षा के साथ हुई थी। उस समय परीक्षा लंदन में होती थी और अंग्रेजी माध्यम में आयोजित की जाती थी। बाद के वर्षों में Public Service Commission की व्यवस्था विकसित हुई और स्वतंत्र भारत में भर्ती प्रक्रिया को संविधान के तहत संस्थागत आधार मिला।

शताब्दी पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट

UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने शताब्दी स्मारक सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी किया। इसके साथ भारत में UPSC और Public Service Commissions की नीतियों को आकार देने वाले 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित पुस्तक भी जारी की गई।

दो दिन के आयोजन में Manthan भी

UPSC का शताब्दी समारोह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को दो दिन आयोजित किया गया। पहले दिन भारत मंडपम में Shatabdi Samaroh – Manthan कार्यक्रम हुआ, जिसमें Civil Services की बदलती भूमिका, Public Administration में Innovation और संस्थागत मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। UPSC चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने आयोग के अगले चरण के लिए Trust, Transparency और Technology को तीन अहम आधार बताया। कार्यक्रम में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, UPSC अधिकारी शामिल हुए।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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