
लखनऊ, 1 अक्टूबर 2026:
यूपी के अलग-अलग जिलों में हुई घटनाओं में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गुरुवार को डीजीपी को ज्ञापन देने पुलिस मुख्यालय जा रहे अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को पुलिस ने गोमतीनगर स्थित कार्यालय के पास ही घेर लिया। इस घटनाक्रम के बाद मौर्य ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह पूरे प्रदेश के पीड़ितों की आवाज लेकर डीजीपी कार्यालय जा रहे थे तो लखनऊ पुलिस उनका ज्ञापन कैसे ले सकती है।
श्री मौर्य के प्रस्तावित ज्ञापन में आठ गंभीर आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है। इनमें अयोध्या के कंदेला में श्रीराम लगन मौर्य हत्याकांड, गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड, कासगंज में पवन कोरी हत्याकांड, प्रतापगढ़ में अर्जुन गौतम हत्याकांड और बदायूं में राजेश कोरी हत्याकांड शामिल हैं। इसके अलावा सुल्तानपुर में मंगल कोरी और उनके पूरे परिवार पर हमला, प्रतापगढ़ में सौरभ विश्वकर्मा हत्याकांड तथा सुल्तानपुर के अखंडनगर में राजन पर जानलेवा हमले का मामला भी ज्ञापन में उठाया गया है।

अपनी जनता पार्टी का आरोप है कि इन मामलों में नामजद होने के बावजूद कई आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। पार्टी ने सभी मामलों में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी, पीड़ित परिवारों को न्याय और प्रभावी पुलिस कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन की प्रतियां मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह, लखनऊ के डीएम और पुलिस आयुक्त को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
पुलिस द्वारा रोके जाने पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्होंने पांच दिन पहले ही डीजीपी कार्यालय को अपने आने की सूचना दे दी थी। उन्होंने बताया था कि वह पीड़ित परिवारों के मामलों में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाएंगे। मौर्य के मुताबिक कई मामलों में एक महीने या उससे अधिक समय बीतने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उत्तर प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था व गुंडे माफिया एवं अराजकतत्वों द्वारा SC/ST/OBC तथा मुस्लिम समाज पर कहर वरपा करने वालो की गिरफ्तारी करने में भेद – भाव करने के सम्बन्ध में DGP के प्रतिनिधि को ज्ञापन दिया । pic.twitter.com/hLwlZQJLx3
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) October 1, 2026
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाया कि अयोध्या, गोंडा, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और बनारस जैसे जिलों से जुड़े मामलों में लखनऊ पुलिस आखिर क्या कार्रवाई करेगी। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछा कि क्या उन्हें डीजीपी ने उनका ज्ञापन लेने के लिए अधिकृत किया है। उनका कहना था कि यदि ज्ञापन लेना ही था तो डीजीपी कार्यालय से किसी अधिकृत अधिकारी को भेजा जाना चाहिए था। इस घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई और विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा उठाए जा रहे गिरफ्तारी के सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।






