Lucknow News: बाढ़ ने दिखाई शहर की कमजोर कड़ी, अब गोमती के किनारे 115 किमी लंबा तटबंध बनाने की तैयारी
2,000 करोड़ रुपये की परियोजना से फैजुल्लागंज से नैमिष तक बदलेगी तस्वीर, एलडीए और सिंचाई विभाग बनाएंगे डीपीआर, तटबंध पर 4-6 लेन सड़क का भी प्रस्ताव

लखनऊ, 8 अक्टूबर 2026:
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच राजधानी लखनऊ में बाढ़ और जलभराव की भयावह तस्वीर सामने आने के बाद अब शासन-प्रशासन की नजर स्थायी बचाव उपायों पर है। बाढ़ से निपटने के लिए फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक करीब 115 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाने की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्तावित परियोजना पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शासन स्तर पर इसे स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) योजना में शामिल कर गति देने पर भी विचार चल रहा है।
सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी एलडीए और सिंचाई विभाग को सौंपी है। दोनों विभाग मिलकर इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी तो अगले महीने से निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
परियोजना के तहत आईआईएम रोड स्थित ग्रीन कॉरिडोर से पक्का पुल तक के हिस्से में तटबंध निर्माण की जिम्मेदारी एलडीए को दी गई है। इस हिस्से पर करीब 182 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं ग्रीन कॉरिडोर से नैमिषारण्य तक के दूसरे हिस्से का काम सिंचाई विभाग देखेगा।
हालांकि 115 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की राह आसान नहीं होगी। सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की होगी। तटबंध की जद में किसानों की जमीन और बस्तियां आने पर विरोध की स्थिति बन सकती है। प्रभावित लोगों के पुनर्वास के साथ पर्यावरणीय मंजूरी और संभावित कानूनी अड़चनें भी परियोजना की रफ्तार प्रभावित कर सकती हैं।

विशेषज्ञों की चिंता यह भी है कि बाढ़ मैदान के सिकुड़ने से गोमती के प्राकृतिक प्रवाह, भूजल रिचार्ज और नदी के पारिस्थितिक तंत्र पर असर पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और भविष्य में तटबंध के रखरखाव का खर्च भी चुनौती बनेगा।
इसके बावजूद परियोजना से फैजुल्लागंज और आसपास के निचले इलाकों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है। तटबंध के ऊपर चार या छह लेन सड़क बनाने का प्रस्ताव भी है। इसके बनने से ग्रीन कॉरिडोर, आईआईएम रोड, फैजुल्लागंज, पक्का पुल और नैमिषनगर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
शासन में पूरे प्रोजेक्ट को एक ही नोडल एजेंसी यानी एलडीए से कराने पर भी विचार हो रहा है। इससे निर्णय, बजट और निर्माण प्रक्रिया में तालमेल बढ़ने की उम्मीद है। एलडीए ने एकीकृत डीपीआर के लिए इंजीनियरों की विशेष टीम लगाई है, जबकि सिंचाई विभाग जल्द ही गोमती के प्रस्तावित रूट का सर्वे शुरू करेगा। यानी बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब सरकार की नजर उस स्थायी इंतजाम पर है, जो अगली बाढ़ में लखनऊ को कम से कम नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है।






