Lucknow News : 40 दिन तक वादा पूरा होने का इंतजार, समान वेतन की मांग पर बॉन्डेड डॉक्टर्स भड़के, पुलिस बस रोकी
लखनऊ में वेतन में असमानता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, हिरासत में लेने पहुंची बस के सामने लेटकर कहा, ऊपर चढ़ा दो, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 2 सितंबर को 24 घंटे में शासनादेश जारी करने का दिया था भरोसा, डॉक्टरों का दावा, कहीं 50 से 55 हजार तो कहीं 1.10 लाख रुपये तक मिल रहा मासिक वेतन

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को बॉन्डेड MBBS डॉक्टरों का प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया, जब उन्हें हिरासत में लेने पहुंची पुलिस की बस के सामने कई डॉक्टर लेट गईं। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने बस को हाथों से धक्का देकर रोक दिया। उनका कहना था कि वे पिछले 40 दिन से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन डिप्टी सीएम के आश्वासन के बावजूद अब तक कोई फैसला नहीं हुआ।
समान डिग्री, फिर वेतन में इतना अंतर क्यों
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड MBBS डॉक्टर हैं। उनका आरोप है कि समान डिग्री, बॉन्ड की एक जैसी शर्तें और सेवा प्रक्रिया होने के बावजूद उनके वेतन में बड़ा अंतर है। डॉक्टरों ने सभी के लिए समान वेतनमान लागू करने के साथ बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग की।
2 सितंबर को मिला था 24 घंटे का भरोसा
डॉक्टरों के मुताबिक, 2 सितंबर को भी गांधी प्रतिमा पर वेतन में अंतर के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान प्रदर्शनकारी डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की मांग कर रहे थे। बाद में पाठक बारिश के बीच प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और करीब 20 मिनट तक डॉक्टरों से बातचीत की। डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम ने बताया था कि उनकी मांगों से जुड़ी फाइल पूरी हो चुकी है। उन्होंने अगले दिन दोपहर 2 बजे तक समान वेतन समेत दूसरी मांगों पर शासनादेश जारी करने का भरोसा दिया था। इस आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया था, हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 40 दिन बीतने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ।
50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहा मानदेय
बॉन्डेड डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें दो साल की अनिवार्य सरकारी सेवा या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की शर्त के तहत काम करना पड़ता है। उनकी तैनाती ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) समेत दूसरे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में की जाती है। इसके बदले उन्हें करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है।

दूसरे डॉक्टरों को 1.10 लाख रुपये तक भुगतान का दावा
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि समान MBBS डिग्री, बॉन्ड, काउंसलिंग और चयन प्रक्रिया के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में बॉन्ड सेवा कर रहे कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक भुगतान किया जा रहा है। डॉक्टरों ने इसे वेतन में असमानता बताते हुए सभी बॉन्डेड डॉक्टरों के लिए एक समान वेतनमान लागू करने की मांग उठाई है।
हिरासत में लेने पहुंची पुलिस, बस के आगे लेटीं डॉक्टर
मंगलवार दोपहर गांधी प्रतिमा पर नारेबाजी कर रहे डॉक्टरों को हिरासत में लेने के लिए पुलिस बस लेकर पहुंची थी। पुलिस ने कुछ डॉक्टरों को हिरासत में लिया। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी बस के आगे लेट गईं। कुछ डॉक्टरों ने बस को हाथों से धक्का देकर रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने डिप्टी सीएम पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।






