CEC ज्ञानेश कुमार के समर्थन में खड़े हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती, बोले- विरोध के नाम पर अराजकता उचित नहीं
परमार्थ निकेतन में मीडिया से बातचीत में CJP पर साधा निशाना, प्रदर्शन के तरीकों पर उठाए सवाल, कहा- लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना गलत

योगेंद्र मलिक
देहरादून, 14 अक्टूबर 2026ः
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर दिल्ली में सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अपनी प्रतिक्रिया दी। परमार्थ निकेतन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रदर्शन के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाना और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है। चिदानंद सरस्वती ने ज्ञानेश कुमार का समर्थन किया।
लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे में हो आंदोलन
चिदानंद सरस्वती ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए, लेकिन विरोध जताते समय संविधान, कानून और संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा का ध्यान रखना भी सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का संचालन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्थाओं के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे तौर-तरीके नहीं अपनाए जाने चाहिए, जिनसे संस्थाओं की प्रतिष्ठा प्रभावित हो या लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा पर सवाल खड़े हों। उन्होंने चिंता जताई कि यदि विरोध प्रदर्शनों में संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
संसद से सुप्रीम कोर्ट तक की गरिमा का सवाल
स्वामी चिदानंद ने आगाह करते हुए कहा कि आज संसद को निशाना बनाया जा रहा है। कल ऐसी परिस्थितियां सर्वोच्च न्यायालय के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। इसलिए विरोध के नाम पर अराजकता को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बयानों में असहमति के अधिकार और संवैधानिक मर्यादाओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। कहा कि लोकतंत्र में विरोध की स्वतंत्रता के साथ कानून का सम्मान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।






