विधानसभा चुनाव 2027 : बीजेपी को झटका, मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता कांग्रेस में शामिल
दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी ने रामशरण नौटियाल को दिलाई सदस्यता, 12 साल बाद हुई वापसी, भाजपा ने 2022 के चुनाव में चकराता सीट से बनाया था उम्मीदवार

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 19 अक्टूबर 2026ः
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों के भीतर हलचल तेज होने लगी है। इसी बीच भाजपा के पूर्व नेता और मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। सोमवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। रामशरण नौटियाल की 12 साल बाद कांग्रेस में वापसी हुई है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने कुछ दिन पहले छोड़ दी थी भाजपा
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस में शामिल होने से कुछ दिन पहले भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन पर विराम लग गया। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें देहरादून जिले की चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
कुमारी शैलजा ने SIR को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
अब रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी से चकराता में पार्टी की रणनीति और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस में शामिल होने के मौके पर कुमारी शैलजा ने एसआईआर और अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। इन मुद्दों के जरिए कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। इस मौके पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह मौजूद रहे।
यशपाल बेनाम ने अभी किसी दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की
इससे पहले पूर्व विधायक और पौड़ी नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने भी 18 अक्टूबर को भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अभी तक किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच अब सबकी निगाहें प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की आगामी रणनीति पर टिकी हैं। चुनाव में अभी समय है, लेकिन नेताओं के दल बदलने से उत्तराखंड की सियासत में राजनीतिक चर्चाओं का दौर जरूर तेज हो गया है।






