UP News : लखनऊ से प्रतापगढ़ तक शस्त्र पूजन, राजा भैया ने दिखाया हथियारों का जखीरा
विजयदशमी पर लखनऊ में क्षत्रिय समाज ने किया शस्त्र पूजन, उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा बोले- प्रभु श्रीराम की मर्यादा की याद दिलाता है पर्व, बेंती कोठी में 500 देशी-विदेशी शस्त्रों का पूजन

लखनऊ/प्रतापगढ़, 20 अक्टूबर 2026:
विजयदशमी यानी दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा मंगलवार को धूमधाम से निभाई गई। यूपी की राजधानी लखनऊ से लेकर प्रतापगढ़ तक विभिन्न स्थानों पर शस्त्रों की पूजा की गई। हालांकि, सबसे अधिक चर्चा प्रतापगढ़ में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष एवं कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के शस्त्र पूजन की रही। बेंती कोठी में आयोजित कार्यक्रम में राजा भैया करीब 500 देशी-विदेशी हथियारों की पूजा करते नजर आए। इस दौरान उनका एक वीडियो भी सामने आया है।

लखनऊ में शास्त्र और शस्त्र की अहमियत पर जोर
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में क्षत्रिय समाज के लोगों ने शस्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि शस्त्र पूजन प्रभु श्रीराम की मर्यादा की याद दिलाता है और शास्त्रों की परंपरा के अनुरूप है। सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि देश के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र भी जरूरी हैं। कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अनिल सिंह गहलोत समेत कई लोग शामिल हुए। इस दौरान विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया।

बेंती कोठी में हथियारों का प्रदर्शन, परिवार भी हुआ शामिल
प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद स्थित राजा भैया की बेंती कोठी में दशहरे के अवसर पर करीब दो घंटे तक शस्त्र पूजन का कार्यक्रम चला। धोती-कुर्ता और केसरिया साफा पहने राजा भैया ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हथियारों की पूजा की। इस दौरान उनके जुड़वां बेटे शिवराज और बृजराज भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि और सैकड़ों समर्थकों ने भी हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार शस्त्रों के साथ उनके लाइसेंस भी रखे गए थे।
पूजन के बाद राजा भैया ने कहा कि विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा, ‘हम सभी धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।’ राजा भैया ने इसे अपने परिवार की पुरानी परंपरा बताते हुए कहा कि लोगों को भारत की गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराने और उनसे जोड़ने की जरूरत है। कार्यक्रम के दौरान आचार्य ने वैदिक मंत्रों के साथ पूजा कराई। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण किया गया।






