Varansi News : चांदी के फाइटर प्लेन पर काशी की कारीगरी, सात समंदर पार तक पहुंची मांग
Wings Over Ganga Air Show : राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कुंज बिहारी ने तैयार की लड़ाकू विमान की अनुकृति, कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी मिले ऑर्डर, गुलाबी मीनाकारी ने लगाए चार चांद

वाराणसी, 24 अक्टूबर 2026:
Kunj Bihari Singh : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का असर अब काशी की पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी पर भी दिख रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह ने एयर शो से प्रेरित होकर चांदी से लड़ाकू विमान की अनुकृति तैयार की है। गुलाबी मीनाकारी की बारीक कारीगरी से सजी इस कलाकृति को देश-विदेश में पसंद किया जा रहा है। शिल्पकार को इसकी तस्वीर ग्राहकों के साथ साझा करने के बाद करीब 100 पीस के ऑर्डर मिल चुके हैं। इनमें कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से मिली मांग भी शामिल है।
एक महीने में तैयार किया फाइटर प्लेन
कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि एयर शो की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने लड़ाकू विमान की अनुकृति बनाने का फैसला किया था। इसे तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। कलाकृति बनाने में 400 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना है कि गुलाबी मीनाकारी में नए प्रयोग करने की कोशिश रहती है। इस बार भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन ने उन्हें ऐसी कलाकृति बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें काशी की पारंपरिक कला के साथ देश की सैन्य ताकत की झलक भी दिखाई दे।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेंट करना चाहते हैं कलाकृति
शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह इस फाइटर प्लेन की कलाकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, इस उत्पाद को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। अलग-अलग आकारों में इसे तैयार करने की मांग भी सामने आ रही है। करीब 100 पीस के ऑर्डर मिलने से गुलाबी मीनाकारी के लिए नए बाजार खुलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस पारंपरिक शिल्प की मांग अब सामान्य सजावटी वस्तुओं से आगे बढ़कर भारतीय सैन्य शक्ति से जुड़ी कलाकृतियों के लिए भी दिख रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बनाई थी ब्रह्मोस मिसाइल की कलाकृति
कुंज बिहारी सिंह इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की अनुकृति भी गुलाबी मीनाकारी से तैयार कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उस कलाकृति को भी देश-विदेश में पसंद किया गया था। अब फाइटर प्लेन की कलाकृति के जरिए वह इस कला को नए विषयों से जोड़ रहे हैं। उनका प्रयास है कि गुलाबी मीनाकारी के माध्यम से भारतीय सेना की उपलब्धियों और देश के गौरव से जुड़े विषयों को भी सामने लाया जाए।
सरकारी योजनाओं से शिल्पकारों को मिल रहा सहारा
कुंज बिहारी सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जीआई (Geographical Indication) और ओडीओपी (One District One Product) से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों से गुलाबी मीनाकारी को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि आर्थिक सहायता, निःशुल्क टूल किट, प्रशिक्षण और उत्पादों की बेहतर पैकिंग जैसी सुविधाओं से शिल्पकारों को काम आगे बढ़ाने का मौका मिला है। उनके मुताबिक, इस कला से युवाओं की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। पारंपरिक शिल्प से दूर हो रही नई पीढ़ी अब दोबारा इससे जुड़ने लगी है।

गुलाबी मीनाकारी को नए बाजारों से जोड़ने की कोशिश
वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी अपनी रंगीन कारीगरी और बारीक डिजाइन के लिए पहचानी जाती है। इसे जीआई टैग मिला हुआ है और यह उत्तर प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों में शामिल है। पारंपरिक डिजाइन के साथ नए प्रयोगों से शिल्पकार इसके लिए नए ग्राहक तलाश रहे हैं। फाइटर प्लेन जैसी कलाकृति इसी कोशिश का हिस्सा है। कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से मिले ऑर्डर बताते हैं कि काशी की इस कला के लिए विदेशों में भी बाजार मौजूद है।






