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ई-रिक्शा को लेकर कानून तोड़ने की ठानी थी गडकरी ने, बोले- मानवी शोषण खत्म करना था लक्ष्य

नई दिल्ली, 31 मई 2025:
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को अपनी नई पुस्तक ‘संघतिल मानवी व्यवस्थापन’ के विमोचन के अवसर पर एक अहम खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 11 साल पहले जब वह पहली बार मंत्री बने थे, तब ई-रिक्शा को शुरू करने का निर्णय लिया और इसके लिए यदि कानून को एक नहीं बल्कि दस बार भी तोड़ना पड़े, तो वह तैयार थे।

गडकरी ने कहा कि उस वक्त देशभर में करीब एक करोड़ लोग साइकिल रिक्शा चलाते थे, जिसमें एक इंसान को दूसरे इंसान को खींचना पड़ता था। उन्होंने इसे “अमानवीय” प्रथा बताया और कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसे मानवी शोषण करार दिया था। गडकरी ने कहा, “मैंने ठान लिया था कि इस प्रथा को खत्म करना है। अगर इसके लिए एक बार नहीं, दस बार भी कानून तोड़ना पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।”

गडकरी ने बताया कि इलेक्ट्रिक रिक्शा के आने से लाखों लोगों को फायदा हुआ है और यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा से न केवल श्रम शोषण खत्म हुआ, बल्कि रोजगार और आत्मसम्मान की नई राहें भी खुलीं।

इस मौके पर आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि गडकरी की यह पुस्तक संघ की कार्यशैली और मानवीय प्रबंधन की एक झलक है, जिसे उन्होंने सरल भाषा में प्रस्तुत किया है।

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गडकरी ने यह भी कहा कि राजनीति पैसा कमाने का माध्यम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े उदाहरण देते हुए बताया कि वह इंजीनियरिंग की परीक्षा पास नहीं कर पाए थे और 12वीं में केवल 52% अंक मिले थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

गडकरी ने महात्मा गांधी का उद्धरण देते हुए कहा, “अगर आप किसी गरीब की मदद कर रहे हैं तो एक बार नहीं, दस बार भी कानून तोड़ सकते हैं।” यही सोच लेकर उन्होंने ई-रिक्शा को देश में लाने की शुरुआत की थी।

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