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ईरान देगा NPT को अलविदा? भारत ने किन परमाणु संधियों से बनाई दूरी, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली, 17 जून 2025:
इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक मंच पर परमाणु हथियारों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस बीच ईरान के संसद स्तर पर परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने पर विचार की खबरें सामने आई हैं। अगर ईरान वाकई ऐसा करता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। ईरान का कहना है कि हालात के मद्देनज़र वह उचित फैसला लेगा।

दुनिया में परमाणु हथियारों को रोकने के लिए कई अहम अंतरराष्ट्रीय संधियाँ बनी हैं। इनमें प्रमुख हैं NPT (Nuclear Non-Proliferation Treaty), CTBT (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty), TPNW (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons) और SALT (Strategic Arms Limitation Talks)। NPT का मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। इसे 1970 में लागू किया गया था और अब तक 191 देश इसके सदस्य हैं।

CTBT की बात करें तो यह सभी तरह के न्यूक्लियर परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि है, लेकिन यह अब तक प्रभावी नहीं हो पाई है। वहीं TPNW संधि 2017 में संयुक्त राष्ट्र के तहत बनी, जो परमाणु हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है। SALT, अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हथियारों की सीमा तय करने की पहल थी।

भारत का रुख इन संधियों पर अलग रहा है। भारत ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं क्योंकि वह इसे भेदभावपूर्ण मानता है। उसका तर्क है कि यह संधि परमाणु संपन्न देशों को विशेषाधिकार देती है और अन्य देशों पर पाबंदी लगाती है। CTBT को भी भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से स्वीकार नहीं किया है। TPNW का भी भारत समर्थन नहीं करता।

इस समय रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया – कुल 9 देश परमाणु हथियार संपन्न हैं। इन देशों के पास 9600 से ज्यादा परमाणु हथियार हैं, जो दुनिया को तबाह करने के लिए काफी हैं।

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