लखनऊ, 4 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला और बाल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बाल गृहों और महिला शरणालयों की चौबीसों घंटे डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाया है। महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित इन संस्थाओं की निगरानी अब स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से की जा रही है। यह सेंटर अप्रैल 2025 से लखनऊ के बंगला बाजार स्थित महिला कल्याण निगम भवन में लगातार कार्य कर रहा है।
सुरक्षा के लिए तय हुई जवाबदेही
इस व्यवस्था के तहत प्रदेशभर की संस्थाओं पर रियल टाइम नजर रखी जा रही है। इसका उद्देश्य केवल निगरानी नहीं, बल्कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा, देखरेख और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना है। तकनीक के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही को व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
70 संस्थाओं में सीसीटीवी से निगरानी
प्रदेश में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित 60 बाल गृह और 10 महिला शरणालय, कुल 70 संस्थाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के माध्यम से रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा रही है।
निगरानी को मजबूत बनाने के लिए मंडल और जिला स्तर पर भी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है। 17 मंडलों में से 15 मंडलीय कार्यालयों और 31 जनपदों में से 28 जनपदीय कार्यालयों में मॉनिटरिंग डिस्प्ले लगाए जा चुके हैं। शेष दो मंडल चित्रकूट और अयोध्या तथा तीन जनपद चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर में यह कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।

मुख्यालय से लगातार मॉनिटरिंग
मुख्यालय स्थित स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस है। यहां छह प्रशिक्षित कर्मचारी तीन शिफ्ट में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं, ताकि निगरानी व्यवस्था में किसी भी तरह की रुकावट न आए। निगरानी के दौरान साफ सफाई, स्टाफ की उपस्थिति, बच्चों के साथ व्यवहार, रसोई की स्थिति, भोजन की तैयारी, सुरक्षा गार्ड की सतर्कता और बच्चों की देखरेख जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
नियम टूटे या हुई लापरवाही तो तुरंत होती कार्रवाई
यदि किसी संस्था में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाता है। इससे समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और जिम्मेदारी तय हो रही है। Lucknow News UP
महिला कल्याण विभाग की यह पहल प्रदेश में महिला और बाल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। डिजिटल निगरानी के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को और भरोसेमंद बनाया गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






