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UP में ‘श्रीअन्न’ की रिकॉर्ड खरीद : किसानों ने बाजार छोड़ सरकार पर जताया भरोसा, 790 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित भुगतान के रूप में किसानों को मिला सीधा लाभ, बाजरा बना सबसे बड़ा आधार, ज्वार और मक्का की खरीद में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी

लखनऊ, 4 जनवरी 2026:

यूपी में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान ‘श्रीअन्न’ (बाजरा, ज्वार और मक्का) की सरकारी खरीद ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस बार किसानों ने निजी बाजार के बजाय सरकारी खरीद को प्राथमिकता दी। इसका सीधा लाभ उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित भुगतान के रूप में मिला। योगी सरकार की पारदर्शी खरीद व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान की वजह से किसानों का भरोसा सरकारी तंत्र पर और मजबूत हुआ है
राज्य में एक अक्टूबर से शुरू हुई श्रीअन्न की खरीद प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष बाजरा, ज्वार और मक्का की कुल खरीद पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक रही। इसके साथ ही किसानों को किया गया भुगतान भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

खरीफ वर्ष 2025-26 में बाजरा की खरीद 33 जनपदों में की गई। इसके लिए 90,513 किसानों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 54,253 किसानों से 2.13 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया। इसके एवज में सरकार ने 598.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया। जबकि पिछले वर्ष 2024-25 में केवल 1.01 लाख मीट्रिक टन बाजरा की खरीद हुई थी और किसानों को लगभग 268 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इस वर्ष बाजरा का MSP 2775 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया था।

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ज्वार की खरीद 11 जनपदों में की गई। कुल 20,307 किसानों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 13,454 किसानों से 43,562 मीट्रिक टन ज्वार की खरीद हुई। इसके लिए किसानों को लगभग 162 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। ज्वार का MSP मालदांडी किस्म के लिए 3749 रुपये और हाईब्रिड किस्म के लिए 3699 रुपये प्रति कुंतल रहा।

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वहीं मक्का की खरीद 25 जनपदों में हुई। 7,106 किसानों के पंजीकरण में से 3,445 किसानों से 13,209 मीट्रिक टन मक्का खरीदा गया, जिसके बदले 31.96 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। मक्का का MSP 2400 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया था।

सरकारी खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता, ऑनलाइन पंजीकरण, तौल में निष्पक्षता और सीधे खातों में भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाई। यही वजह रही कि इस वर्ष ‘श्रीअन्न’ की सरकारी खरीद को व्यापक समर्थन मिला। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है बल्कि पोषण सुरक्षा और मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो रही है।

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